
लॉक डाउन,मगर कुछ भी नही ठहरा,
ना वक्त,
ना जिंदगी,
और ना ही मौत!
हम भी कहाँ ठहरे,
किसी के कदम चल रहे,
किसी के कलम,
किसी के आँसूं,
और किसी की राजनीत!
यूँ कहें तो
लॉक डाउन है,
मगर जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा बेचैन है,
और बेचैन है,
वक़्त,
मौत,
कलम,
पांव,
आँसू
और राजनीति भी पहले से कहीं ज्यादा!
!!!मधुसूदन!!!

