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कुछ आज छोड़ गए,कुछ कल छोड़ जाएंगे,
नश्वर है सबकुछ यहाँ,
एकदिन हम भी छोड़ जाएंगे,
ये हम कौन,
मालूम नहीं,
जिह्वा को स्वाद चाहिए,
शरीर को आहार चाहिए,
आँखें देखने को कहती हैं,
कानों को वो धुन चाहिए,
त्वचा को स्पर्श,साँसों को खुशबू,
और हमें,वो चाहिए,
जो हँसाता है,रुलाता भी है,
गुदगुदाता है,तड़पाता भी है,
गुल को गुलशन,
गुलशन को गुल चाहिए,
पसन्द अपनी,अपनी सबकी,
हमें तो
सिर्फ तुम चाहिए,
ये तुम कोई और नहीं बल्कि वही है,
जिसके बगैर हम और हमारा रूह,
वैसे ही तड़प उठते हैं,
जैसे जल बिन मछली।
!!!मधुसूदन!!!

