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देख रहा है देश हमारा,राजनीत का मैला खेल,
गिरगिट,चीते,साँढ़,लोमड़ी,भ्रष्ट,पतित,सच्चे का मेल।
जब भी क्षण मतदान के आते,
लोक लुभावन नारे लाते,
एक दूजे को चोर बताकर,
आपस में वे हमें लड़ाते,
हम लड़ते वे जश्न मनाते,
मिलजुल एक ही थाल में खाते,
कहने को बस धुर विरोधी,
मतलब से सब घुलमिल जाते,
उजले कपड़े,काली सोच,
स्याह कोठरी के सब चोर,
एक अदद कुर्सी की खातिर,
बाप को अपने देते छोड़,
यहाँ ना कोई रिस्ते,नाते,
यहाँ ना कोई त्याग दिखाते,
यहाँ न कोई अपना वैरी,यहाँ नही भाई का प्रेम,
देख रहा है देश हमारा,राजनीत का मैला खेल,
देख रहा है देश हमारा,राजनीत का मैला खेल।
!!!Madhusudan!!!
#राजनीति
#politics

