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KEWAL SIYASAT/केवल सियासत

जहाँ भी देखा वहीँ सियासत,
तख्त,ताज में उलझे शासक,
इनका कब ईश्वर से नाता,
इनको सिर्फ सियासत भाता,
मजहब-मजहब से लड़वाते,
जाति-जाति में भेद कराते,
कोई रंग हरा लहराता,
कोई केसरिया दिखलाता,
सबको केवल अस्त्र समझते,
हम रोते जब, तब ये हँसते,
इनके कब थे नेक इरादे,
हम तो थे पहले से प्यादे,
ढोंग है अल्लाह,ईश इबादत,
इनका केवल धर्म सियासत|
!!! मधुसूदन !!!

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