नाम खुदा का रटते देखा,अल्लाह,ईश्वर जपते देखा,
रटता जो गीता,कुरान उसको भी जहर उगलते देखा,
हृदयहीन दानव था मस्जिद से मैं उसे निकलते देखा,
हृदयहीन दानव था मंदिर की सीढ़ियों को चढ़ते देखा।
कहते सब मंदिर रब बसते,मस्जिद सबसे पाक जगह है,
अल्लाह,ईश्वर भजनेवालों का ये कैसा आज कहर है,
हिन्दू-मुस्लिम हँसते देखा,इंसानों को मरते देखा,
हृदयहीन दानव था मंदिर की सीढ़ियों को चढ़ते देखा,
हृदयहीन दानव था मस्जिद से मैं उसे निकलते देखा।
गीता मानवता सिखलाती,त्याग सिखाती रामायण,
वेद हमें जीना सिखलाते,लाखों देकर उदाहरण,
कहते भूखे को भोजन देना कुरान सिखलाता है,
मजलूमों को मदद करो ये सबक हमें सिखलाता है,
धर्म सभी जीना सिखलाते,मिलजुल कर रहना सिखलाते,
कौन भला फिर काफ़िर कह इंसानों में हैं भेद बताते,
धर्म की बातें करते देखा,कंठीमाला जपते देखा,
भेद किया इंसाँ में उस पाखंडी को मैं हँसते देखा,
हृदयहीन दानव था मस्जिद से मैं उसे निकलते देखा,
हृदयहीन दानव था मंदिर की सीढ़ियों को चढ़ते देखा।
प्रेम सभी जीवों में,अपनों के खोने का होता गम,
मूक मगर उनकी आँखें भी देख कभी होते हैं नम,
रब का ये संसार एक है,सृष्टि का बस सार एक है,
अल्लाह,ईश्वर,गौड़,गुरु सिखलाए वो आधार प्रेम है,
प्रेम फूल कांटो में देखो,बचपन की यादों में देखो,
अल्लाह,ईश्वर,गौड़,गुरु जो बोल गए बातों में देखो,
जिसने ये नफरत फैला दी,ईश्वर में ही भेद बता दी,
भेद किया इंसाँ में मस्जिद से मैं उसे निकलते देखा,
हृदयहीन दानव था मंदिर की सीढ़ियों को चढ़ते देखा।
!!!मधुसूदन!!!
Nafrat Ke Saudagar

