मजहबी जलसा इंसानियत पर भारी हो गया,
वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला ही
भारत पर भारी हो गया।
ताज्जुब नही हमें,चहुँओर होते शोर का,
तेरे कुतर्कों,मुरखपन के जोर का,
बेशक कातिल है तूँ फिर भी तुझे धर्म से जोड़,
कई और तेरा साथी हो गया,
वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला ही
भारत की उम्मीदों पर भारी हो गया।
जब सम्पूर्ण विश्व कोरोना की विभीषिका में जल रहा था,
जिसका जितना ज्ञान इससे लड़ने का प्रयत्न कर रहा था,
जब होटल,धर्मस्थल,मनोरंजन के साधन,
सम्पूर्ण वतन बंद था,
जब घरों में कैद रहना ही,
औरों से दूरी बनाकर रखना ही
इससे बचने का एकमात्र मंत्र था,
तब तूँ विश्व के अनगिनत लोगों का पनाहगार बना,
सारे नियमों की धज्जियाँ उड़ा खुद ही सरकार बना,
मगर क्या गुनाह किया तूने,
तुम्हें तनिक भी आभास नही,
सब गलती सरकार की,तुम्हारा कोई पाप नही,
तेरी धर्मांधता,सम्पूर्ण नागरिकों की जिंदगी,
लॉकडाउन पर भारी हो गया,
वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला ही
भारत की उम्मीदों पर भारी हो गया,
वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला ही
भारत की उम्मीदों पर भारी हो गया।
!!!मधुसूदन!!!
नोट: तबलीगी जमात की तरह कोई भी मस्जिद,मंदिर,गुरुद्वारे या कोई भी संस्था भीड़ को रखती है जिसमें विदेशी भी भारी मात्रा में शामिल हों जिनसे कोरोना बढ़ने का खतरा है,ये कोई भी माफी के काबिल नही।

