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Hamne apne ek priye lekhika Yasmin ji ki ek kavita padhi aur kuchh shabd panktiyan ban gaye:—
है आरजू ये मेरी इनकार मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
माना कि जन्नत है प्रेम की नगर में,
बचना बड़े धोखे हैं प्रेम की डगर में,
मीठी मीठी बातों पर ऐतबार मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
किया प्रेम चैन से फिर सो नही पाओगे,
हँसना तो दूर कभी रो भी नही पाओगे,
मतलब की दुनियाँ है विश्वास मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
पता है आजकल आईने खूब भाते हैं,
सजने संवरने में वक़्त गुजर जाते हैं,
खुद से हो दूर पास चाँद मत समझना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
काँटों भरे जीवन मगर फूल सी महक है,
गुलदस्ते की जिंदगी में बोल कैसी चहक है,
गुलशन को छोड़ गले का हार मत बनना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
!!! मधुसूदन !!!

