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Betiyan

बेटियाँ, बेटियाँ, बेटियाँ,
आधी आबादी संसार की,
जिसपर,
कुछ संरक्षक धर्म और समाज के,
पाँव में बेड़ी लगाया है,
अस्तित्व जो पुरुषों की,
उसको,
घूंघट और बुर्का पहनाया है,
वैसे तो कल भी,
कुछ बेटियों को आजादी थी,
बहुत सी बेटीयों पर आज भी,
और कल भी,
पुरुष मानसिकता हावी थी,
बावजूद,
जब-जब मौका मिला,
बेटियों ने अपनी क्षमता दिखाया है,
पुरुषसोच और अहंकार को,
मिट्टी में मिलाया है,
भरी पड़ी है इतिहास नारियों के,
वीरता ,शोहरत और बलिदान की गाथा से,
कब मिटेगी संकीर्णता,
रजिया बेगम,झांसी की रानी सरीखे,
अनगिनत बेटियाँ बैठी है आशा से,
ऐ पुरुष मानसिकता वाले इंसान,
आ अपनी रूढ़िवादिता मिटा दो,
सदैव खुद को,
तेरे लिए कुर्बान करने को बैठी,
नारियों से जुल्म का पर्दा हटा दो,
वरना अब वह दिन दूर नही जब,
सारे बन्धन टूट जाएंगी,
बेटियाँ भी तेरे संग मिल,
दुनियाँ में,
भारत का परचम लहराएंगी।
!!! मधुसूदन

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