Betiyan
बेटियाँ, बेटियाँ, बेटियाँ,
आधी आबादी संसार की,
जिसपर,
कुछ संरक्षक धर्म और समाज के,
पाँव में बेड़ी लगाया है,
अस्तित्व जो पुरुषों की,
उसको,
घूंघट और बुर्का पहनाया है,
वैसे तो कल भी,
कुछ बेटियों को आजादी थी,
बहुत सी बेटीयों पर आज भी,
और कल भी,
पुरुष मानसिकता हावी थी,
बावजूद,
जब-जब मौका मिला,
बेटियों ने अपनी क्षमता दिखाया है,
पुरुषसोच और अहंकार को,
मिट्टी में मिलाया है,
भरी पड़ी है इतिहास नारियों के,
वीरता ,शोहरत और बलिदान की गाथा से,
कब मिटेगी संकीर्णता,
रजिया बेगम,झांसी की रानी सरीखे,
अनगिनत बेटियाँ बैठी है आशा से,
ऐ पुरुष मानसिकता वाले इंसान,
आ अपनी रूढ़िवादिता मिटा दो,
सदैव खुद को,
तेरे लिए कुर्बान करने को बैठी,
नारियों से जुल्म का पर्दा हटा दो,
वरना अब वह दिन दूर नही जब,
सारे बन्धन टूट जाएंगी,
बेटियाँ भी तेरे संग मिल,
दुनियाँ में,
भारत का परचम लहराएंगी।
!!! मधुसूदन


Bhut achhi baat Kahi apne
AB ye SB nahi chlega Jo hua so hua
धन्यवाद शुभांकर जी अपने पसन्द किया और सराहा सुक्रिया आपका।
Swagat Hai apka sir
bahut hi umda likha hai aapne bahut khub
dhanyawad Danish Bhayee…..sab din betiyon ke saath do bhav kiya jaataa raha hai…..dharm aur samaj ke aad men jo ab nahi chalnewaala ……..sukriya apka….
बहुत ही अच्छा लिखा है आपने। बहुत खूब।
sukriya hamare blog par aaj ghumne aur kavita ko pasand karne ke liye…..
Betio ka ekdum sahi halat bayan ki hn aapnay…. bahut badia
Sukriya apka apne pasand kiya aur sarahaa.
बहुत सुंदर !
Sukriya apka..
Strong and superb.
Thank you very much for your valuable comments.
बहुत अच्छा लिखा है आपने
Sukriya apka….
प्रशंसनीय ….अति सुंदर मधुसूदन जी 😇
आपने पसंद किया और सराहा बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
सुक्रिया अपने पसंद किया और सराहा।
इससे ख़ूबसूरत कुछ हो नाहीं सकता।
sukriya apka…..pasand karne ke liye….
sukriya apka…..pasand karne ke liye….
Pleasure is mine