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भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की काली अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के महा अत्याचारी राजा कंस के कारागृह में वसुदेव की पत्नी एवं देवकी के गर्भ से एक बालक का जन्म हुआ,जिसे हम भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं।
“आखिर हम उन्हें भगवान क्यों ना कहें।”
जरा सोचिए,ऐसा कौन भाग्यहीन बालक होगा जिसका जन्म कारागृह में हुआ हो तथा जन्म के समय माँ-बाप जंजीरों में जकड़े हों। जिसके जन्म से पहले से ही दुश्मन विद्यमान हों। दुश्मन भी साधारण नहीं खुद राजा कंस हो। फिर भी उस कारागृह से बचकर निकल जाता है तथा कालांतर में जिसका पालन,पोषण गोकुल में यशोदा एवं नन्द के द्वारा होता है।
जन्म के साथ ही एक से बढ़कर एक दुश्मनों से मुकाबला करना,ग्वालों के साथ गाय चराना,नाचते,गाते,हँसते,मुस्कुराते,ग्वाल,बालों संग जीवन बिताते,कंस जैसे महा बलशाली राजा का अंत करना, माँ-बाप को कारागृह से मुक्त कर उन्हें मथुरा सौंप खुद कोसो दूर द्वारका में अपना आशियाना बना द्वारकाधीश कहाना,
तत्पश्चात राजा होते हुए भी किसी को राजा बनाने के लिए खुद सारथी ( Driver) बन जाना,कर्मयोगी बन उसे कर्म का पाठ पढ़ाना किसी चमत्कार,सपने और अजूबे से कम नहीं।
साथ ही अपने समय के एक से बढ़कर एक ज्ञानी,चतुर,धूर्त,क्रूर और बलशाली राजाओं को एक कारागृह में जन्म लेनेवाला बालक अपने आगे नतमस्तक होने पर विवश कर देता हो, जिसे शस्त्रविहीन होते हुए भी कोई बाँध ना पाया हो, सर्वसम्पन्न होते हुए भी जिसका दिल दया,करुणा,ममता और त्याग से भरा हो,जो दोस्ती का फर्ज निभाना जानता हो,तथा जिसने दुनियाँ को गीता का ज्ञान दिया,वह हमारे प्रमाण का मोहताज नहीं और ना ही हमारे कहने से वह भगवान है।
वह निश्चित ही भगवान है।
वे हमारे देश में अवतरित हुए भगवान विष्णु के 8 वें अवतार और हमारे धर्म के ईश्वर हैं।उनके जन्म दिवस पर हमसभी उनका जन्मोत्सव मनाते हैं जिसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं।
आप सभी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
!!!मधुसूदन!!!
ज्ञान:–ये कर्मभूमि है।यहाँ निराश रहनेवाले और डरनेवालों के लिए कोई जगह नहीं है। जब कारागृह में जन्म लेनेवाला,हजारों दुश्मनों से घिरा हुआ द्वारकाधीश बन सकता है तो क्या हमारे पास निराश रहने का उससे ज्यादा कारण है ?

