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KASHMIRI PANDIT/कश्मीरी पंडित

Image Credit : Google

तिनका तिनका जोड़ बनाया,महल नही हक मेरा जी

जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।

नाम बताऊँ क्या मैं खुद का,

चेहरे नाम बता देंगे,

दर्द कहूँ क्या नयन हमारे,

सारे दर्द बता देंगे,

मैं कश्मीर का पंडित हूँ,कश्मीर नही हक मेरा जी,

जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।

मैं बतलाऊँ जुल्म हुए क्या,

कोई आकर पूछ कभी,

मेरा भी था चमन उजड़ गए,

आ संग मेरे रुक कभी,

दोष हमारा हिन्दू होना,ऐब यही बस मेरा जी,

जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।

अगल बगल कहने को अपने,

उनमें कुछ मुखविर बने,

घर से हमें निकाल मारनेवालों के

वे तीर बने,

कुछ अबोध बच्चे थे वे भी,देखा नही सवेरा जी,

जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।

अरे मौन क्यों तख्त,सियासत,

खुशी ये ढलनेवाली सुन,

जो आँधी कश्मीर में आई

यहाँ भी आनेवाली सुन,

नींद तोड़,उठ जाग आग वह,आज यहाँ भी घेरा जी,

जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।

!!!मधुसूदन!!!

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