KASHMIRI PANDIT/कश्मीरी पंडित

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तिनका तिनका जोड़ बनाया,महल नही हक मेरा जी
जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।
नाम बताऊँ क्या मैं खुद का,
चेहरे नाम बता देंगे,
दर्द कहूँ क्या नयन हमारे,
सारे दर्द बता देंगे,
मैं कश्मीर का पंडित हूँ,कश्मीर नही हक मेरा जी,
जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।
मैं बतलाऊँ जुल्म हुए क्या,
कोई आकर पूछ कभी,
मेरा भी था चमन उजड़ गए,
आ संग मेरे रुक कभी,
दोष हमारा हिन्दू होना,ऐब यही बस मेरा जी,
जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।

अगल बगल कहने को अपने,
उनमें कुछ मुखविर बने,
घर से हमें निकाल मारनेवालों के
वे तीर बने,
कुछ अबोध बच्चे थे वे भी,देखा नही सवेरा जी,
जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।
अरे मौन क्यों तख्त,सियासत,
खुशी ये ढलनेवाली सुन,
जो आँधी कश्मीर में आई
यहाँ भी आनेवाली सुन,
नींद तोड़,उठ जाग आग वह,आज यहाँ भी घेरा जी,
जो घर था मेरा अब उनका,मेरा रैन बसेरा जी।
!!!मधुसूदन!!!


वाकई हकीकत है ये……
अफशोष !! इस हकीकत का।
Umdaa Panktiyan Madhusudan ji… Bohat khoob
बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
Bhot shanndaar kavita 🔥🌻🙂❤
Comment likhna chah रहा पर लिख नही पा रहा जल्द लिखेगें सुन्दर टिप्पणी ❤
कभी-कभी कलम सुस्त पड़ जाती 😄😋
इतना लिख दिए बहुत लग रहा है।🙂
वैसे ये कविता आपकी कविता पढ़ने के बाद ही लिखा है।
Bahut sunder rachna hai. Dil ko chhoo lete hain apke shabd.
बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
एैसा क्यों होता है???? हम सिर्फ एक तरफ की बात देख कर फैसला क्यों ले लेते है😑
जनता गुमराह है या गुमराह होना उसकी आदत। या फिर स्वार्थ।
बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति, कश्मीरी पंडितों के साथ किया गया व्यवहार वास्तव में एक निंदनीय घटना थी !
बहुत बहुत धन्यवाद आपका उनके प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए। किसी एक इंसान की हत्या करते रूह कांप जाती होगी। उन्हें नरसंहार करते ताज्जुब है कलेजा नही काँपा।सोचनीय है।
मानवीय पीड़ा के प्रति संवेदना मानव का एक सहज गुण है !कलेजा इंसानों का कांपता है, आमानवीय रूप से एकत्रित बरबस भीड़ का नहीं ! तभी तो मैंने कहा कि निंदनीय है !
कमाल का जवाब होता है आपका साथ ही इतनी सुंदर हिंदी तथा शब्दों का लाजवाब प्रयोग पंक्तियों में गजब का जान डाल देता है।
धन्यवाद, मधुसूदन जी !
स्वागत आपका।
भगवान ने हमें बनाया
सारा जीवन
सभी चीजें
हमारा घर
आत्मा है
के तहत
की छत
खुद की त्वचा
दर्द
दुख
अंदर से
और बाहर
भगवान ने हमें बनाया
सारा जीवन
सभी चीजें
हमारा घर
आत्मा है
के तहत
की छत
खुद की त्वचा
दर्द
दुख
अंदर से
और बाहर
भालू
यह हमारा है
दैनिक प्रार्थना
में भगवान हमारे
आत्मा
कि हम में है
सभी लोगों को
कानून
हम ले जाते हैं
हमारी गलती है
और हमारा
दुश्मनों
कि दूसरों के
प्यार
सब कुछ शामिल है
केवल भगवान
एकदम सही है
यह हमारे साथ है
हर चीज में
एक पूरे व्यक्ति
बनने के लिए
यह हमारा है
दैनिक प्रार्थना
में भगवान हमारे
आत्मा
कि हम में है
सभी लोगों को
कानून
हम ले जाते हैं
हमारी गलती है
और हमारा
दुश्मनों
कि दूसरों के
प्यार
सब कुछ शामिल है
केवल भगवान
एकदम सही है
यह हमारे साथ है
हर चीज में
एक पूरे व्यक्ति
बनने के लिए
🙏🙏
कितनी हैरानीयत की बात है कि जो बोले नही उनका दर्द कोई समझा नही। बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति।
कुछ लोग यहाँ ऐसे हैं जो चितत्कार की करें तो भी कोई सुननेवाला नही।आप बोलने की बात करते हैं। आहूत हो चुकी है मानवता तुष्टिकरण की बलिबेदी पर।
Beautiful poem heart touching poem straight from heart.
Thank you very much for your condolences.
बहुत सुंदर
सिक्के का एक ही पहलू देखने की आदत ने देश का बहुत ज्यादा कबाड़ा किया है। दुर्भाग्य से कश्मीरी पंडित हमेशा से दूसरे पहलू पर ही रह गए जहां किसी ने देखना उचित नहीं समझा
Durbhagya hai es desh ka…..log tustikaran men insaniyat ka galaa ghot rahe hain…….hamen koyee pramaanpatra dene ki jarurat nahi ki ham sahishnu hain yaa nahi, hamen ye bataane ki jarurat bhi nahi ki ham sab se prem karnewale log hain yaa nahi……es desh ki tamaam honewaali ghatnaayen sabkuchh bayaan kar rahi hai…..aisaa nahi ki koyee dharm aisaa hai jahan sirf kattar rahte hain yaa aisaa bhi nahi ki koyee dharm men koyee kattar nahi…….magar insaaniyat bachnaa chahiye.