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Siskiyaan

दिल तड़पता रहा हम तरसते रहे,
अश्क आँखों से पल-पल बरसते रहे,
जिनको पूजा न जाने कहाँ खो गया,
हाय किस्मत मेरा,वेवफा हो गया।।
एक उपवन में हम उनसे ऐसे मिले,
एक डाली पर जैसे कलि दो खिले,
हम किनारें,नदी की तरह वे मगर,
जिंदगी को न जाना ये क्या हो गया,
कैसे किश्मत मेरा,वेवफा हो गया।।
साथ में देख कर लोग कहते रहे,
दो बदन एक जाँ हैं समझते रहे,
हम पवन थे अगर तो वे कुछ कम नहीं,
संग पत्तों के जैसे वे उड़ते थे
वे भी नादान थे हम भी नादान थे,
प्यार से एक दूजे के अनजान थे,
जान थे पर ना समझे ये क्या हो गया,
कैसे किश्मत मेरा,वेवफा हो गया।।
एक दिन फिर वो काली रात आ गई,
दरवाजे पर एक दिन बारात आ गई,
वो संवरती रही मैं सजाता रहा,
उसकी खुशियों में मैं मुश्कुराता रहा,
रात भर जश्न था मैं भी मदमस्त था,
कितना नादान मैं गम से अनजान था,
फिर क़यामत हुयी जब सुबह हो गयी,
मानो डोली नहीं मेरी अर्थी सजी,
मैं जहाँ पर खड़ा था खड़ा रह गया,
उनकी डोली उठाकर कोई ले गया,
खून आँखों से उसके बरसने लगे,
जिस्म से जान जैसे निकलने लगे,
वे तड़पकर के मुझको बुलाते रहे,
बेजुबाँ थे हमें ओ रुलाते रहे,
प्यार समझा मगर अब ये किस काम का,
है जहाँ ये हँसीं पर ये किस काम का,
मेरी नज़रों से ओझल जहाँ हो गया,
कैसे किश्मत मेरा,वेवफा हो गया।।
प्यार था अब किसी को जताते नहीं,
ये अलग बात है भूल पाते नहीं,
कैसा किस्मत मुझे वे बुलाते नहीं,
भूलकर हम उन्हें भूल पाते नहीं,
रब ये कैसा हमारा जहाँ हो गया,
हाय किश्मत मेरा,वेवफा हो गया,
हाय किश्मत मेरा, वेवफा हो गया,
!!!मधुसूदन!!!

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