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UMMID/उम्मीद

Image Credit : Google

Hamare priye blogger Aruna ji ke dard ko shabbon me pirone ka ek prayas evam Ishwar se dua……Click here

ऐ हवा जरा रुक के,

धीरे-धीरे गुजर,

तेरी राहों में एक महल है ताश का,

जहाँ अरमान अभी,अभी हिलोरे ले रहे हैं,

उसे पत्थरों का

ताजमहल ना समझ।

ऐ पल जरा थम जा,

अभी-अभी तो जिंदगी खिली है

वसन्त सी,

हँसने दे,

उसे अभी पतझड़ ना कर।

ऐ खुदा,

जानते है कानून बहुत सख्त है तेरा,

मगर ये भी पता है

तूँ बहुत ही रहमदिल है,

बस एक दुआ मेरी भी कुबूल कर ले,

ख्वाहिशें दी है,उड़ान मत रोक,

सहारा किसी का वो पाँव मत तोड़,

देख पलकें बंद किसी की,

धड़कन किसी और की थमी है,

कर थोड़ी रहम,आँखों में शेष अब भी नमी है,

सुना है दुआ पत्थरों में भी जान डाल देती है,

तूँ तो रखवाला है जगत का,

तेरे आदेश के बिना एक पत्ता भी नही हिलता,

तूँ इतना बेरहम ना बन,

तूँ इतना बेरहम ना बन।

!!!मधुसूदन!!!

“लाखों बेकसूर लोगों की जिंदगी एवं लाखों बेकसूर के सपने रोज बिखर रहे हैं। अगर वे गुनहगार नही फिर गुनाहगार कौन? दोषी कोई और और सजा किसी और को,ये ऊपरवाले का कैसा कानून?”

” ऐसा ही एक बेकसूर बच्चा आज जिंदगी एवं मौत से जूझता एक अस्पताल में जिसे दवा के साथ साथ दुवाओं की जरूरत है।”

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