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MAA KI YAADEN/माँ की यादें

खोया बाबुल का घर-आँगन,खोया भाई का वो शासन,
खोया तेरा लाड़-दुलार,बहुत याद आती है,
माँ याद आती है।
माँ जब भी हम रूठ गए तुम आकर हमें मनाती थी,
बड़े प्यार से अपने हाँथों से माँ हमें खिलाती थी,
खेल-कूदकर धूल-धूसरित आते,दौड़ी गले लगाती माँ,
गोद तुम्हारे सिर रख अपना मैं अबोध सो जाती माँ,
थपकी वाली तेरी प्यार,लाखों चुम्बन की बौछार,
थप्पड़ में भी तेरा प्यार,बहुत याद आती है
माँ याद आती है।
सखियों संग उन्मुक्त जहाँ की बातें हुई पुरानी माँ,
हँसने,गाने,शोर मचाने के दिन सब याद आती माँ,
कितना था मामूली शासन,मेरे पापा का अनुशासन,
गुस्से में भी उनका प्यार,बहुत याद आती है,
माँ याद आती है।
माँ मेरी चिंता मत करना कोई गम की बात नही,
बात-बात पर ताने दे,वैसी भी मेरी सास नहीं,
कैसे कर दूँ मैं इनकार,खुशियाँ यहाँ भी बेशुमार,
सब देते हैं हमको प्यार,फिर भी याद आती है,
माँ याद आती है।
लाखों बिटिया सिसक रही है ऐसी सबकी भाग्य नही,
सास,ननद की तानों से ज्यादा उनकी सौभाग्य नही,
आते नैहर से जब लोग,कहती झूठी खुशियाँ जोड़,
हँसती पोछकर अपनी लोर,बहुत याद आती है,
माँ याद आती है।
बहुत याद आती है,तेरी याद आती है।
!!!मधुसूदन!!!

Image Credit :Google
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