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Ye Kaisa Hindustan

Baltal: Pilgrims cross mountain trails during their religious journey to the Amarnath cave on the Baltal route, some 125 kms away from Srinagar on Saturday. PTI Photo(PTI7_8_2017_000150B)

जितना प्रेम करते हैं हम अपने हिंदुस्तान से,
उतना ही प्रेम करते हम,हिन्द के आवाम से,
हैं हिन्दू हम सच्चाई है,मेरा भी हिंदुस्तान है,
धर्म हो कोई भी उसमें,बसती मेरी जान है,
संख्या अस्सी फीसदी मेरी,मेरे हिंदुस्तान में,
फिर भी मेरी कद्र क्यों नहीं है हिंदुस्तान में।

जाति-धर्म छोड़ देख,मैं भी तो इंसान हूँ,
तेरे संबिधान का मैं भी तो अवाम हूँ,
बोल क्या कुकर्म किया,मुझे भी बताओ ना,
किसी को सताया कभी,मुझे भी बताओ ना,
प्रेम और अहिंसा का संदेश दी जहान में,
फिर भी मेरी कद्र क्यों नहीं है हिंदुस्तान में।

रंग दो ना मजहब का,ऐसे कोई जेहाद को,
धर्म से ना जोड़ कभी,कोई उग्रवाद को,
मार उसे अब ना छोड़,खून जिसे चाहिए,
हिन्द में बसा है जिसे हिन्द नहीं चाहिए,
जंग जीत लेंगे हम सीमा पार वालों से,
सीमा में छिपे हैं वो गद्दार नहीं चाहिए,
हम लुटाये जान जब होते वो तूफान में,
फिर भी मेरी कद्र क्यों नहीं है हिंदुस्तान में।

शर्म कर जमीर तेरा,क्यों नहीं धिक्कारती,
कत्ल हुए भक्त की अब आत्मा पुकारती,
रो रहे हैं हम ना मेरा और इम्तेहान ले,
अपना उसे बोल-बोल,मेरी अब ना जान ले,
आँख खोल तुम भी बोल,किसका इंतेज़ार है,
मिट रहे हैं आज हम,क्या खुद का इंतजार है,
जितना प्रेम करते हैं हम अमरनाथ धाम से,
जितना प्रेम करते हैं हम अपने भगवान से,
उतना ही प्रेम करते हम,हिन्द के आवाम से,
हम हैं सबके साथ खड़े अपने हिंदुस्तान में,
फिर भी मेरी कद्र क्यों नहीं है हिंदुस्तान में।
फिर भी मेरी कद्र क्यों नहीं है हिंदुस्तान में।
!!! मधुसूदन !!!

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