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नए साल का पहला ख्वाब

काश! कपट छल कम हो जाते,स्वार्थ हृदय से खत्म हो जाते,
छट जाते बादल नफरत के,बहते दिल से प्रेम बयार,
यही आस,उम्मीद,याचना,नए साल का पहला ख्वाब।
क्षणभंगुर जीवन राही अनजान सफर है,
कौन यहां पल अंतिम किसका,किसे खबर है,
आ पग चिंता त्याग बढ़ाना,हर पल नूतन वर्ष मनाना,
हम खुश रहते,तुम मुस्काते,खुश रहता सारा संसार,
यही आस,उम्मीद,याचना,नए साल का पहला ख्वाब।
मानव जाति एक,एक ही सबका रब है,
जाति,धर्म का भेद,यही नफरत की जड़ है,
हम मटमैले छोड़ विचार,संकीर्णता की तोड़ दीवार,
अब मानवता धर्म निभाते,सबको हंसकर गले लगाते,
बदलते जीने का अंदाज,
यही आस,उम्मीद,याचना,नए साल का पहला ख्वाब।
यही आस,उम्मीद,याचना,नए साल का पहला ख्वाब।madhureo.com

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