
हैं रंग कई इस जीवन के,
डूबे कुछ में कुछ छूट गए,
हैं जश्न अलग हर आयु के,
शामिल कुछ में कहीं चूक गए।
आगे भी जश्न प्रतीक्षारत,
कहे दिल शरीक हो जाऊं मैं,
पर बांध कई जीवन नद में,
जिससे नित ही टकराऊं मैं,
टकराते तुम भी नित हर पल,
सज बैठे ख्वाहिश के रथ पर,
है झूठी शान,दुविधा गुरुर,
बंधे जिसमें जलसों से दूर,
है वक्त वक्त के साथ चलो,
संकोच छोड़ मुस्कान भरो,
पल जी लो जो हैं पास उसे,
पल पल जीवन नद सूख रहे,
कब आए वापस गुजरे पल,
गर चूक गए तो चूक गए,
कब आए वापस गुजरे पल,
गर चूक गए तो चूक गए।
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