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देख जिंदगी में रंग,
मैं तो हो गई हूँ दंग,
कभी इतनी उमंग थी ना आई,
मेरी जिंदगी बहार चली आई।2
मैं थी नदियों की धार,
चली छोड़ के पहाड़,
बांध कोई भी जहां की,
नही रोक सकी चाल,
तेरी सागरों सी बाँह में समाई,
मेरी जिंदगी बहार चली आई।2
तू भी हवा के समान,
आये मेरे तू जहान,
शोख,अल्हड़,हसीन,
भरी तेरे संग उड़ान,
आंधियों सी आसमान में उड़ाई,
मेरी जिंदगी बहार चली आई।2
मैं थी आग के समान,
खुद जली,जलाना काम,
आये तुम करीब मेरे,
छाये मेघ के समान,
पल कैसी थी समझ मे ना आई,
मेरी जिंदगी बहार चली आई।2
ताप से पिघल रहे थे,
मेघ तुम बरस रहे थे,
बूंद-बूंद जल तुम्हारे,
ज्वार मंद कर रहे थे,
आग-पानी संग आज मुश्कुरायी,
मेरी जिंदगी बहार चली आई।2
!!! मधुसूदन !!!

