फर्श से अर्श पर आ गए धर्म के सहारे,
अब जातियों का विभाजन
तख्त पर कायम रहने का हथियार बनेगा,
20-30 साल अब जातियों को लड़ाकर ही साम्राज्य चलेगा।
तत्पश्चात आएगा धर्म पुनः नए रूप में,
बदलेंगे समीकरण,बदल जाएंगे जातियों के नाम,
परन्तु क्या मिट पाएगा जातिवाद?
हम धीरे धीरे ही सही मगर,
पुनः मिलजुल कर रहने लगे थे,
सच है कि कोढ़ है जातिवाद!
मगर इस कोढ़ से उबरने लगे थे,
परन्तु मिलजुल कर रहना हमारा,
सियासत को पसंद नहीं,
समझ सकें सियासत को,
इतने भी हम अक्लमंद नहीं।
!!!madhusudan!!!

