महाभारत का युद्ध आसान था शायद,
आसान था कल,
मर्यादित रावण से
टकरा जाना,
परन्तु आसान नही यहाँ नारियों का,
ख्वाहिशों के पंख लगा अम्बर को छू पाना,
जहाँ अब भी निराशाओं के बादल
जलजला बन डूबाने को आतुर
ख्वाबों की नैया,
जहाँ अपनों के ताने,
दावानल बन झुलसाने को ततपर
अरमानों की मड़ैया,
जहाँ समाज का लोक-लाज,
बन चट्टान ततपर रोकने को राह,
जहाँ भीतर अपनों का अवरोध,
बाहर गिद्ध दृष्टि भरे लोग,
वहाँ आसान नही
कुम्हलाते कलियों का
फूल बन खिल पाना,
परन्तु कुछ ऐसे
जो अपने हौसलों को जिंदा रखती,
बचपन से अपने हक को लड़ती,
कभी डूबती,कभी झुलसती,
मगर संयमित,मर्यादित,
सफलता के शिखर पर चढ़ती,
एवं औरों को प्रेरित करते हुए,
पुनः सृजन करती,
अवरोध मुक्त
नव जीवन,नया समाज
हर सफल नारियाँ,हर सफल नारियाँ।
!!!मधुसूदन!!!
“Every successful women”

