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Krurta/क्रूरता

भूख से व्यग्र एक कुतिया,
बार बार गलियों का चक्कर लगाती,
इंसानों को देख अपनी पूँछें हिलाती,
चेहरे के आव-भाव से भूखी होने का भाव दर्शाती
मगर कहीं से भी रोटी का एक टुकड़ा नही मिल पाने पर
वापस अपने बच्चों के पास आकर लेट जाती,
फिर टूट पड़ते नासमझ बच्चे उसपर
और नोचने लगते स्तन।
पेट में अन्न का दाना नही
और ना ही स्तन में दूध,
आखिर कैसे मिटाए
कोई भूखी माँ
अपने बच्चों की भूख!
अचानक बच्चे को झिटक भाग चली,
एक खुलते दरवाजे को देख मन में आस जगी,
मगर उसे क्या खबर बिन बादल बरसात हो जाएगी,
कुसूर कुछ भी नही फिर भी,
रोटियों के बदले लाठियां बरस जाएगी,
शायद उस इंसान को परखने में
उससे चूक हो गई,
गिरती रही लाठियाँ
और बदन सुप्त हो गई,
रुक रुक कर थमती रही सांसे,
और बच्चों की ओर देख-देख बरसती रही आँखें,
शायद निर्बल और भूखे का
यहाँ कोई स्थान नही,
या सबल ही सबकुछ है
ये सोचनेवाला
भूल गया कि वह कोई भगवान नही।
!!!Madhusudan!!!

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