भूख/BHUKH
आपदा भारी,मजबूर सभी,
बेबस कौन?ये सवाल ना पूछो,
लाचारी सर्वत्र है फिर भी,मजदूरों के हालात ना पूछो।
मशीन एक लोहे की,दूजा हाड़-मांस का,
संकट में वतन,
मशीनों के जज्बात क्या,
ताले जड़े कर्मस्थल पर,
अल्लाह कहाँ मलिकार ना पूछो,
लाचारी सर्वत्र है,मजदूरों के हालात ना पूछो।
ऐ दिल मत रो,तेरा कोई दातार नही,
भूख तो सर्वत्र तांडव करती,
तेरा कोई घर-द्वार नही,
यही बात खुद को समझाते,
लाख कोशिशों के बावजूद
गांव बहुत याद आते,
जहाँ निर्धनता है मगर संवेदना जिंदा,
कंक्रीट का शहर नही मगर मानवता जिंदा,
सरकार का सहयोग लगातार जारी,
जिसपर चंद निर्मम की निर्ममता भारी,
आपदा यहाँ भी,संकट वहाँ भी,
छोड़ आए क्यों वर्षों पहले,
उस उजड़े चमन का वजह-ए-मुश्किलात ना पूछो,
लाचारी सर्वत्र है,मजदूरों के हालात ना पूछो।
!!!मधुसूदन!!!



👏🏻👍👌
Kya bt hi
पुनः धन्यवाद आपका।
हृदय स्पर्शी -मशीन एक लोहे की दूजी हाड़ मास की। मशीनी के जज्बात क्या ताले लगे कर्मस्थल पर….. 👌💘
satya vachan.
Bahut hi behtar Madhu bhai…you expressed their agony in befitting way!!!
आप लिखते रहिये। कविताएं बन जाया करेगी। धन्यवाद आपका।
🙏
बहुत बढ़िया 👌👌❤
गांव बहुत याद आते,
जहाँ निर्धनता है मगर संवेदना जिंदा,
हम लड़ेंगे जीतेंगे ये लड़ाई
जान भी जहाँ भी
निर्बल का बल राम हैं🙌🚩
सच हम जीतेंगे।
जंग है कुछ बचेंगे कुछ राख हो जाएंगे,
ये पल याद बहुत आएंगे।
Crisp and meaningful poem
Thank you very much for your valuable comments.
My pleasure sir
आज के समाज का हर पहलू एकदम सही पकड़ा आपने 🙏
धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
“गांव बहुत याद आते,
जहाँ निर्धनता है मगर संवेदना जिंदा,
कंक्रीट का शहर नही मगर मानवता जिंदा,”
बिलकुल सच कहा आपने।
आपदा भारी,मजबूर सभी,
बेबस कौन?ये सवाल ना पूछो,
लाचारी सर्वत्र है फिर भी,मजदूरों के हालात ना पूछो।
मशीन एक लोहे की,दूजा हाड़-मांस का,
संकट में वतन,
मशीनों के जज्बात क्या,
ताले जड़े कर्मस्थल पर,
अल्लाह कहाँ मलिकार ना पूछो,
लाचारी सर्वत्र है,मजदूरों के हालात ना पूछो।
ऐ दिल मत रो,तेरा कोई दातार नही,
भूख तो सर्वत्र तांडव करती,
कोई तेरा घर-द्वार नही,
खुद को समझाते,दिल को बहलाते,
लाख कोशिशों के बावजूद
गांव बहुत याद आते,
जहाँ निर्धनता है मगर संवेदना जिंदा,
कंक्रीट का शहर नही मगर मानवता जिंदा,
सरकार का सहयोग लगातार जारी,
जिसपर चंद निर्मम का निर्ममता भारी,
आपदा यहाँ भी,संकट वहाँ भी,
छोड़ आए क्यों वर्षों पहले,
उस उजड़े चमन का वजह-ए-मुश्किलात ना पूछो,
लाचारी सर्वत्र है,मजदूरों के हालात ना पूछो।
!!!मधुसूदन!!!