Lock-down/लॉक-डाउन

लॉक डाउन,मगर कुछ भी नही ठहरा,
ना वक्त,
ना जिंदगी,
और ना ही मौत!
हम भी कहाँ ठहरे,
किसी के कदम चल रहे,
किसी के कलम,
किसी के आँसूं,
और किसी की राजनीत!
यूँ कहें तो
लॉक डाउन है,
मगर जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा बेचैन है,
और बेचैन है,
वक़्त,
मौत,
कलम,
पांव,
आँसू
और राजनीति भी पहले से कहीं ज्यादा!
!!!मधुसूदन!!!

36 Comments

  • मन की आंखें आभास करती हैं
    जब अप्रिय स्थितियां अट्ठहास करती हैं
    बिखर जाते हैं,,टूट कर सभी
    कितनी रहस्यमय है अपनी प्रकृति
    “” सही वर्णन है वर्तमान का आपकी कलम से 🙏🙏

  • वैसे भी वक़्त और ज़िंदगी कभी रुकती नहीं. बस दिनों की गिनतियाँ बढ़ती जा रही है.
    मार्मिक कविता!!!

    • बहुत बहुत धन्यवाद आपका सराहने के लिए।

  • Daddu. कोरोना सब नाश कर दिया .…कितने सपने टूट रहे पल पल … कितने सपने मर चुके 😞

    बहुत लंबा खीचेगा सब …..लाखों में करोड़ो में भयावह होगा नज़ारा

    • हाँ भाई। एक तरह से सरकार हार गई। लोग सड़कों पर निकलेंगे और भगवान ना करे वैसा हो जिसे देखकर रूह कांप जाए उसके जो देखने के लिए शेष बचें।

      • हर देश की सरकार बेबस …बात मानवता की हार और कोरोना की जीत पर आ गई है😭

        एक बाज़ू उखड़ गया जब से, और ज़्यादा वज़न उठाता हूँ ! -दुष्यंत कुमार

        • बहुत दुखद है भाई। कुछ भी अब समझ नही आ रहा।

          • घर से निकलना तो पड़ेगा

            भूखे मरेंगे नइ तो

            मौत का कुआं ही समझो यारा

            यमराज बाहीरिच खड़ा अब तो
            😹😹😹😭😭😭😭

  • आज भी खिड़कियों से दूर है रोशनी

    आज भी पराजित है सत्य

    आज भी प्यासी है उत्कंठा

    आज भी दीवारों को दहला रही है छत

    आज भी सीटियाँ मार रही है हवा

    आज भी ज़िन्दगी पर नहीं है भरोसा।

    ~ अश्वघोष🌸

    • वाह।
      धोखे में जी रहे जांबाज समझते खुद को,
      पैरों के नीचे जमीन नही और
      बादशाह समझते खुद को।

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