Agyaani
जंगल-जंगल भटक रहा था,
जंगली था इंसान,
ज्ञान दिया भगवान ने हमको,
बना दिया इंसान,
फिर भी बदला क्या इंसान,फिर भी ना बदला इंसान।
ऊंच-नीच का भेद मिटा,
हर रिश्ते को समझाने को,
राजतिलक का त्याग किया,
मानव को पाठ पढ़ाने को,
किसी ने शूली चढ़ हमसब को,
मानवता का ज्ञान दिया,
सत्य,अहिंसा का रब ने ही,
बुद्ध के रूप में ज्ञान दिया,
किसी ने गीता ज्ञान दिया तो,
किसी ने रचा कुरान,
फिर भी बदला क्या इंसान,फिर भी ना बदला इंसान।
किसी ने गीता रट ली जग में,
कोई पढा कुरान यहां,
तोते जैसे आयत रटकर,
मिलता है फिर ज्ञान कहाँ,
अल्लाह या भगवान बड़ा अब,
इसी बात पर लड़ते सब,
जिसने ये संसार बनाया,
उसी की रक्षा करते सब,
मानव का दुश्मन ऐ मानव,
नफरत क्यों तूँ उपजाया,
हर जीवों में मेरी मूरत,
इतना समझ नही पाया,
बार-बार ये ज्ञान सिखाकर,
हार गए भगवान,
अल्लाह,ईश्वर,गॉड एक है,
गीता और कुरान,
फिर भी समझा क्या इंसान,फिर भी ना समझा इंसान।
!!! मधुसूदन !!!



Bhut Sahi likha Hai , kuran aur Geeta pdhne k Baad bhi insaan ko kuch smjh Ni a rha !
Bhut achhi panktiyan Hain
Insan ko dharm ke rakshak samjhne kaha de rahe hai…jiska dukan jyaada chal gya khud ko bhagwaan ghosit kar de rahaa hai.birodh jisne kiya jaan se gayaa…insan to bebas hai kare to kyaa kare.sukriya pasand karne aur sarahne ke liye.
Bhut Sahi baat Kahi apne !
Sukriya apka…
Meri bhi ek kavita bahut kuchh aap ki is kavita ke bhavon se milti hai.. jald hi blog per dalunga ..
Bilkul daliye….jarur padhunga……sukriya apne padha…
आपका स्वागत है दा।
Sukriya apka…
यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हम आपके इतनी प्यारी प्यारी रचनाओं को पढ़ पाते हैं ।
सुक्रिया आपका प्रोत्साहन के लिए।
और ना जाने कब तक हम अंज्ञान रहेगे। शायद आपकी रचना से कुछ लोग समझ पाएँ।
sukriya samajhne ke liye…..evam pratikriya byakt karne ke liye
Bahut h sundar likha h👌
धन्यवाद आपका।
Welcome sir
तू कहा ढूंढे बन्दे तेरा राम तुझमें.. बहुत बहुत अच्छा सर
बहुत खूब!
Sukriya apka…..
सुन्दर अभिव्यक्ति
वैसे तो पूरी कविता ही सुंदर है पर विशेष कर
मुझे कविता में ये पंक्तियां छू गई…
अल्लाह या भगवान बड़ा अब,
इसी बात पर लड़ते सब,
जिसने ये संसार बनाया,
उसी की रक्षा करते सब,
बहुत खूब👍👍
बहुत बहुत धन्यवाद आपका।हमे भी लिखने वक़्त ये लाईन दिल को छू गई थी।
Wao .. Great poem
Thank you very much…