BETI EK BOJH/बेटी एक बोझ

बिटिया तूँ धरा पर आई तुमसे प्यार करेंगे,
फिर भी डरते हैं किससे निकाह करेंगे,
बिटिया किससे तुम्हारा विवाह करेंगे।1

तूँ आई जिस लोक वहाँ हँसकर जीना आसान नही,
फूल हमारी इस धरती पर तेरा है सम्मान नही,
तनया मेरी तूँ अबोध क्या जाने इस संसार को,
कदम-कदम पर दैत्य खड़े हैं तेरे इंतजार को,
बिटिया हर निशाचरों से हम बचाव करेंगे,
फिर भी डरते हैं किससे निकाह करेंगे,
बिटिया किससे तुम्हारा विवाह करेंगे।2

तेरे आते देख यहाँ पर कैसी मातम छाई है,
सर्वगुणी,लक्ष्मी,सुलक्षीणी,कुलक्षिणी कहलाई है,
कलतक थे जो साथ वही अब खफा-खफा से रहते हैं,
तुझे मार दूँ गला घोंट सब हमसे कहते रहते हैं,
बिटिया तेरे लिए सारा अत्याचार सहेंगे,
फिर भी डरते हैं किससे निकाह करेंगे,
बिटिया किससे तुम्हारा विवाह करेंगे।3

तुझे पढ़ाने को हम सारे,गहने गिरवी रख देंगे,
अगर जरूरी पड़ी तुम्हारे कारण भूखे रह लेंगे,
जब हँसते सब गम मिट जाते,ऐसे ही मुस्काना तुम,
माँ पर होते जुल्म देखकर तनया मत डर जाना तुम,
बिटिया तेरे लिए काली के समान बनेंगे,
फिर भी डरते हैं किससे निकाह करेंगे,
बिटिया किससे तुम्हारा विवाह करेंगे।4
!!!मधुसूदन!!!

Image Credit: Google

35 Comments

  • पढ कर बाबा नागार्जुन की कविता “सरकारी बस का ड्राइवर है तो क्या हुआ भी याद आ गई

    • बेशकीमती प्रतिक्रिया।बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने और सराहने के लिए।

      • प्राइवेट बस का ड्राइवर है तो क्या हुआ,
        सात साल की बच्ची का पिता तो है!
        सामने गियर से उपर
        हुक से लटका रक्खी हैं
        काँच की चार चूड़ियाँ गुलाबी
        बस की रफ़्तार के मुताबिक
        हिलती रहती हैं…
        झुककर मैंने पूछ लिया
        खा गया मानो झटका
        अधेड़ उम्र का मुच्छड़ रोबीला चेहरा
        आहिस्ते से बोला: हाँ सा’ब
        लाख कहता हूँ नहीं मानती मुनिया
        टाँगे हुए है कई दिनों से
        अपनी अमानत
        यहाँ अब्बा की नज़रों के सामने
        मैं भी सोचता हूँ
        क्या बिगाड़ती हैं चूड़ियाँ
        किस ज़ुर्म पे हटा दूँ इनको यहाँ से?
        और ड्राइवर ने एक नज़र मुझे देखा
        और मैंने एक नज़र उसे देखा
        छलक रहा था दूधिया वात्सल्य बड़ी-बड़ी आँखों में
        तरलता हावी थी सीधे-साधे प्रश्न पर
        और अब वे निगाहें फिर से हो गईं सड़क की ओर
        और मैंने झुककर कहा –
        हाँ भाई, मैं भी पिता हूँ
        वो तो बस यूँ ही पूछ लिया आपसे
        वरना किसे नहीं भाँएगी?
        नन्हीं कलाइयों की गुलाबी चूड़ियाँ!

        • मैने नही पढ़ा था मगर प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही जिज्ञासा हुई जिसे आपने पूरी कर दी।

    • बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने और सराहने के लिए। बहुत दिनों से आपका कोई पोस्ट नही आया जिसकी कमी खलती है।

  • बहुत ईमानदारी से आपने बेटियों की व्यथा को संबोधित किया है। बहुत खूब सर जी।

    • बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने और सराहने के लिए।

  • Daughters are boon not bane .we have always given full education to daughters to fight back in this callous world. Your poem relates to real issues . A great poem.
    Brijkaul.
    Kindly read my poem I WILL NEVER BE YOUNG AGAIN.
    GIVE YOUR COMMENTS. I EXPECT AJAY JI ALSO TO READ IT.

    • Bahut bahut dhanyawad apka pasand karne aur sarahne ke liye…….samay paakar aapke post jarur padenge. dhanywad.

  • Beautiful poem filled with emotions. Marriage is such a big gamble and so difficult to marry off a daughter.
    And it pains me to see parents marrying off their daughters seeing them as a : boj ☺️or there is no other choice

  • Oh, reading you after a long hiatus.
    Madhusudan bhai aapne bhavnaon ko shabdon ka jo jama pahnaya hai, wah sarahniya hai. Likhte rahiye 🙂

  • पढ़ कर बदन में सनसनी होने लगी थी | आज का कड़वा सच कितनी सटीक बात बेबाक लिखी है आपने|

    • बहुत खुशी हुई सर आपने रचना पसन्द किया। मेरा भी दिल पिघल गया था लिखते वक्त। मगर उनका दिल पता नही कैसा है जो ना तो तलाक देते पिघलता है और ना ही दहेज की आग में बेटियों को जलाते पिघलता है।

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