Sardar Patel/सरदार पटेल
आजादी के वीर सपूतों,पूर्वज पर अभिमान करूँ,
किन शब्दों से करूँ अलंकृत,किनसे मैं गुणगान करूँ।
कितने ऐसे लाल वतन हेतू रण में थे कूद गए,
लानत हम पर कैसे उन वीरों को हमसब भूल गए,
कैसे हुए पटेल किसी एक दल की ग्लानि होती है,
कैसे गाँधीजी पर एक दल की मनमानी होती है,
लौह पुरुष की बनी प्रतिमा उसपर मैं अभिमान करूँ,
किन शब्दों से करूँ अलंकृत,किनसे मैं गुणगान करूँ।
जिसने कई रियासत जोड़े,रजवाड़ों के शासन तोड़े,
दुश्मन बैठे इंतजार में,उनके स्वप्न के आसन तोड़े,
कर्मवीर तूँ धर्मवीर तूँ तुमपर मैं अभिमान करूँ,
किन शब्दों से करूँ अलंकृत,किनसे मैं गुणगान करूँ।
आज यहाँ कुछ वीरों के संग तेरे चर्चे आम हुए,
दुख है देख प्रतिमा तेरी कुछ के दिल क्यों राख हुए,
वर्षों बाद मिली प्रतिष्ठा उसपर मैं अभिमान करूँ,
किन शब्दों से करूँ अलंकृत,किनसे मैं गुणगान करूँ,
किन शब्दों से करूँ अलंकृत,किनसे मैं गुणगान करूँ।
!!!Madhusudan!!!



Beautiful dedication to wonderful defined personality
Thank you very much for your valuable comments.
बहुत सुंदर रचना
बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
🙏😊
👏👏
Wah! Kitna khoob kaha hai…kin shabdon se karun alankrit…bahut badhiya!
बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
31अक्टूबर को इंदिरा गाँधी जी की शहादत का दिन था।अफसोस है इस बात का कि उन्हें किसी ने कहीं भी याद नहीं किया।क्यों?
वो महान थी,महान रहेंगी। वो देश की शान हैं।
She is my ideal lady.😊
सरदार वल्लभ भाई पटेल पर बहुत ही सुन्दर कविता लिखी है आपने।
बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
Most welcome🌹🌹🌹🌹🌹🌹
अब तो नेता लोग भी भारत के महान सपूतों और शहीदों को भुला बैठे हैं या फिर उन पर भी सियासती दाँव लगा रहे हैं।
सच कहें तो इन्हें कब मतलब रहा है अपवादों को छोड़कर।
Absolutely right,dear!!
Utkrishtra rachna uttam vivechna 👌
Bahut bahut dhanyawad apka pasand karne aur sarahne ke liye.
इस देश की मिट्टी में कुछ अलग ही बात है, जो इतनी कठिनाइयों के बावजूद हमेशा महान आत्माओं की भूमि रही हैं|
Shaandaar lekhan dada😍😘❤
जश्न आजाद हम,कैसे लाचार हम,
वीर लाखों लड़े इस वतन के लिए,
कैसे गुमनाम वे,मेरी आँखें है नम,
याद उनको करे ना जमाना भले,
वे अमर थे अमर ही रहेंगे,
जो किए त्याग वे इस वतन के लिए,
मेरे धड़कन में हरपल रहेंगे।
जिनको जितनी शिकायत है करते रहें,
अंध धृतराष्ट बन स्वांग रचते रहें,
जो पड़े धूल उसको हटाएंगे हम,
वीर गाथा जहाँ को सुनाएंगे हम,
वे मेरे आन हैं,उनसे ही शान है,
जो किए त्याग वे इस धरा के लिए
मेरे धड़कन में हरपल रहेंगे।
मेरे धड़कन में हरपल रहेंगे।
धन्यवाद भाई। पसन्द करने के लिए।
waah waah kya baat 🙂
kavita pr kavita likhe jaa rahe dada 🙂 😀
कभी कभी शब्द अनायास पद बन जाते हैं जब घर के लोग बिना कुछ समझे,अनाप शनाप बोलने लगे जाते हैं। धन्यवाद भाई। छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
aapko bhi dada
iss mahine to hum bhi ghar me bahut daant khaya hu 😀
क्या हो गया भाई। आखिर डॉक्टर साहब को डांट क्यों खानी पड़ी।जरूर प्यार वाली डांट होगी।🙂
Haha 😂😂😍😍🤓🤓
छोटे होने के अपने फायदे नुकसान है dada❤
सादर नमन !
बहुत भावभीनी श्रद्धांजलि |
बहुत बहुत धन्यवाद सर पसन्द करने के लिए।🙏🙏
अति उत्कृष्टता लिए आपकी लेखनी जय हिन्द वन्देमातरम
धन्यवाद भाई जी वंदेमातरम।🙏🙏