Maa Bharti Pukarti

Image credit: Google जब-जब हम बिखरे हैं संकट, आर्यावर्त पर छाया, मगर स्वार्थ में उलझ गए हम, अबतक होश ना आया,बेबस माँ भारती, अपनी स्वार्थ की बलि चढ़ा दो,बलिदान मांगती। यहाँ बंटे कल राजा केवल, कितना हाल बुरा था, जिसकी मर्जी रौंद रहा था, नफरत यहां भरा था, मगर मिटा ना स्वार्थ हमारा, हम कल […]

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