DHARM/धर्म
सिंघासन का उलटफेर,जाति-धर्मों एवं साम्राज्यवादी सोच तलेमिटती और पनपती सभ्यताएँ,सदियों से धर्मांधों की गरजती तलवारों के समक्षघुटनों के बल सिसकती इंसानियत,एवं दिल से मिटतेदया,करुणा,त्याग,प्रेम एवं रहम के नामोनिशानताज्जुब है फिर भी लोग कहते हैंधर्म जिंदा है,सच में धर्म जिंदा है तो कहाँ है धर्म?धर्म आज भी वहां जिंदा है जहाँमंदिर,मस्जिद,मुल्ला,पंडित हो ना हो,मगर जब भी […]
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