VYAKUL MANN/व्याकुल मन
Image Credit : Google ना चैन डगर,ना चैन नगर, ना मंजिल सुकूँ दिलाता है, कैसी ठगनी संसार यहाँ इंसान तड़प रह जाता है।। हम भी बेचैन हैं वर्षों से, व्यथित,व्याकुल हैं अरसों से, है ख्वाब कई आँखों मे छवि बसाए फिरते अपनों के, है खुशियाँ कम अरमान बहुत, जग में सारे परेशान बहुत, है यहाँ […]
