AARZU/ आरजू

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Hamne apne ek priye lekhika Yasmin ji ki ek kavita padhi aur kuchh shabd panktiyan ban gaye:—
है आरजू ये मेरी इनकार मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
माना कि जन्नत है प्रेम की नगर में,
बचना बड़े धोखे हैं प्रेम की डगर में,
मीठी मीठी बातों पर ऐतबार मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
किया प्रेम चैन से फिर सो नही पाओगे,
हँसना तो दूर कभी रो भी नही पाओगे,
मतलब की दुनियाँ है विश्वास मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
पता है आजकल आईने खूब भाते हैं,
सजने संवरने में वक़्त गुजर जाते हैं,
खुद से हो दूर पास चाँद मत समझना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
काँटों भरे जीवन मगर फूल सी महक है,
गुलदस्ते की जिंदगी में बोल कैसी चहक है,
गुलशन को छोड़ गले का हार मत बनना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
!!! मधुसूदन !!!


त्याग प्रेम भी करता है और स्वार्थ भी। अंतर सिर्फ इतना है कि स्वार्थ मतलब निकलते भूल जाता है और प्रेम का फिर कही स्वांग करता है जबकि प्रेम स्वांग नही जानता वो तो त्याग अपने अहम एवम खुद के मैं का त्याग कर देता है। वो लेना कुछ भी नही चाहता सिर्फ देना जानता है। मगर जब कोई उसे छलता है तो दिल से बद्दुआ नही निकलती मगर ऐसे ही आवाज निकलती है। आखिर वो इंसान है भगवान नहीं।
प्रेम हक जताता है,
प्रेम गुस्सा भी करता है,
प्रेम स्वयं को मिटा अपने चाहनेवालों को बचाता है,
मगर दगा मिलने और किसी और के दस्तक पर दिल को विचलित देख शायद ये कहने पर मजबूर हो जाता है कि—-
है आरजू ये मेरी इनकार मत करना,
ऐ दिल भूल से फिर प्यार मत करना।
Very well written 🙂
Thank you very much.☺️
This is so beautiful Sir Ji!
Behad khubsurat 🌸
Dhanyawad apka Pasand karne ke liye.
Nice.
Thank you.
मैं तो अभी तक प्यार को अनमोल रत्न मानती हूं।सच्चे प्यार में कभी धोखा नहीं मिलता बशर्ते मान लीजिये कि सच्चा प्यार त्याग मांगता है।हमने देखी है उन आँखों से महकती खुशबू ,हाथ से छूके इन्हे रिश्तो का कोई नाम ना दो…….प्यार तो रूहानी होता है ना।
सच कहा प्रेम अनमोल है मगर सच्चे प्रेम की दुकान नही। परखना आसान नही।
प्रेम सत्य है प्रेम ईश है,प्रेम से हम अनजान नहीं,
प्रेम के बदले प्रेम चाहते,इंसाँ हूँ भगवान नहीं।
जिसने छल पाया है दिल मे रहती जिंदा यादें,
एक दरस मिल जाये आस में अटकी रहती साँसे,
जिसका दिल टूटा दिखता है उसको कोई राह नही,
प्रेम के बदले प्रेम चाहते,इंसाँ हूँ भगवान नहीं।
लेकिन सच्चा प्रेम तो त्याग माँगता है।ऐसा इन्सान अपने प्यार से बिछुड़ कर भी उसके लिये हमेशा दुआऐं देता है-गिले शिकवे वहाँ नहीं होते।दिल टूट जाये तो महबूब ही खुदा बन कर दिल में आ बसता है।
बहुत बढ़िया कविता ,शब्दों का बढ़िया उपयोग !!!👌👌👌!!!
पसन्द आया अच्छा लगा। सुक्रिया आपका।
🙏🙏🙏
👏👏
Nice sir👌👌
Thank you very much.👏
Beautiful.. 😇👌🏼👌🏼👌🏼
Thank you very much.
My pleasure.. 😇😇
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Nice…🤗
Thanks.