कुछ बातें
दबकर दिल में रह जाती है बात,
बहुत कुछ कहने को,
बनकर आए जो हमराज,
निभाने जीवन भर का साथ,
वही जब पढ़ ना सके इन आँखों के जज्बात,बचा क्या कहने को,
दबकर दिल में रह जाती है बात,बहुत कुछ कहने को।
कलतक जिनके प्राण हमीं शहजादे थे,
कोरे सारे कसमें झूठे वादे थे,
दिए जो खुशियों की शौगात,
दिए वे ही मातम की रात,
नजर में प्रेम हो जिनके केवल एक लिबास,बचा क्या कहने को,
दबकर दिल में रह जाती है बात,बहुत कुछ कहने को।
उनके छल और धोखे की क्या बात करूँ,
जिसको अब भी मैं उतना ही प्यार करूँ,
बना बेदर्दी खुद हमदर्द,
सुना ना कोई दिल का अर्ज,
गया सब लूट वही जो था मेरा मेहताब, बचा क्या कहने को,
दबकर दिल में रह जाती है बात,बहुत कुछ कहने को।
दबकर दिल में रह जाती है बात,बहुत कुछ कहने को।
!!!मधुसूदन!!!



Lovely and miss reading your poems regularly.
बहुत सुन्दर
बहुत बहुत धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
भावनाओं से भरी सुंदर रचना।
बहुत बहुत धन्यवाद पसन्द करने के लिए।
👌
ये बात सही है🕴️
धन्यवाद मित्र।🙏
बेहद सुंदर😍💓
धन्यवाद आपका।
दिए जो खुशियों की शौगात,
दिए वे ही मातम की रात,
नजर में प्रेम हो जिनके केवल एक लिबास,बचा क्या कहने को,
वाह बहुत ही सुंदर अंकल💕 😊
बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
वाह..!👌🏻👌🏻🙏🏻
सुक्रिया मित्र।🙏🙏
Waah!
धन्यवाद बहन।🙏🙏
🙏
बहुत सुन्दर
धन्यवाद।