Tadapta Insan, Sisakta Loktantra
Image Credit : Google कितनी हमको उम्मीद भरी थी लोकतंत्र, तुम भी छल बैठे, क्यों भूल हमें तुम गोद में टोपीवाले की, आखिर चढ़ बैठे।। चाहत थी निर्धन का तुम, साथ निभाओगे, मजदूर,कृषक का तुम दीपक बन जाओगे, जन्नत जैसी थी गांव उसे भी लोकतंत्र, तूँ मरघट कर बैठे, क्यों भूल हमें तुम गोद में […]
