Karm aur bhagya

एक लेकर आया जग में चम्मच सोने का, दूजा टीन का, एक बन बैठा था शहंशाह के जैसे जग में, दूजा हीन सा।। एक निसदिन इंच खिसकते,अहम में चूर थे, दूजा कर्मपथ पर,हर पल ही मशगुल थे, कर दी उसने सत्यानाश,उँच बड़ेरी खोखड़ बाँस, मगर ज्ञान ना आई लग गई,पाँव में बेड़ी,गर्दन फाँस, वे ज्ञान […]

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