Kaisa Shasan/कैसा शासन

आहें,चीख कहीं सिंघासन, होता जश्न कहीं पर मातम, शासन जनता का है लोकतंत्र सब कहते हैं, फिर क्यों चीख रही है जनता नेता हँसते हैं। बंटे हुए थे जाति-धर्म में उस पर मुहर लगा दी है, सिंघासन के मतवाले, अमृत में जहर मिला दी है, चीखती जनता चलता भाषण, जलता देश मस्त सिंघासन, शासन जनता […]

Posted in PoliticsTagged 13 Comments on Kaisa Shasan/कैसा शासन