MAA-BAAP/माँ-बाप

एक दौर था जब थकान किसे कहते मालूम नही था। कदम चलते नही,उड़ते थे। बाईस,तेईस की उम्र तब मैं दिल्ली में था। जहाँ एक वाक्या हुआ जिसने जीवन के कई सवालों के जवाब दे गए। मैं वहाँ किसी कम्पनी में काम करता था जहाँ हम नौजवानों के बीच लगभग एक साठ वर्ष के बुजुर्ग को […]

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