HALCHAL/हलचल

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संसद की गलियों में हलचल जंग गजब की जारी,

मौन बेचारी जनता,

उलझे बंटवारे में सीटों के विपक्ष और सत्ताधारी,

गौण बेचारी जनता।

ना दुश्मन ना दोस्त यहाँ पर

सब मतलब के साथी,

राजनीत में कहने को बस

धुर-विरोधी पार्टी,

देख चील्ह-कोयल जस बोले,

शेर के संग में गीदड़ डोले,है ये रीत पुरानी,

मौन बेचारी जनता,

उलझे बंटवारे में सीटों के विपक्ष और सत्ताधारी,

गौण बेचारी जनता।

मर्यादा शब्दों की खोयी,

नीतिवान सब मौन यहाँ पर,

सारे दल में उथल पुथल है,

सब मुद्दे हैं गौण यहाँ पर,

मुद्दा खुद को आज बचाना,

चौकीदार को मात्र हटाना,

वंशवाद-परिवार डरा,

अन्ना का भाषणबाज डरा है,

डर ऐसा की भूल गए कैसे थी सत्ता पाई,

थकते ना गाली दे जिसको उसकी करे बड़ाई,

मौन बेचारी जनता,

उलझे बंटवारे में सीटों के विपक्ष और सत्ताधारी,

गौण बेचारी जनता।

!!! मधुसूदन !!!

Sansad kee galiyon mein halachal jang gajab kee jaaree,
maun bechaaree janata,
ulajhe bantavaare mein seeton ke vipaksh aur sattaadhaaree,
gaun bechaaree janata.
na dushman na dost yahaan par
sab matalab ke saathee,
raajaneet mein kahane ko bas
dhur-virodhee paartee,
dekh cheelh-koyal jas bole,
sher ke sang mein geedad dole,hai ye reet puraanee,
maun bechaaree janata,
ulajhe bantavaare mein seeton ke vipaksh aur sattaadhaaree,
gaun bechaaree janata.
maryaada shabdon kee khoyee,
neetivaan sab maun yahaan par,
saare dal mein uthal puthal hai,
sab mudde hain gaun yahaan par,
mudda khud ko aaj bachaana,
chaukeedaar ko maatr hataana,
vanshavaad-parivaar dara,
anna ka bhaashanabaaj dara hai,
dar aisa kee bhool gae kaise thee satta paee,
thakate na gaalee de jisako usakee kare badaee,
maun bechaaree janata,
ulajhe bantavaare mein seeton ke vipaksh aur sattaadhaaree,
gaun bechaaree janata.
!!! Madhusudan !!!

37 Comments

  • आपने इस कविता की रचना द्वारा साफ स्पष्ट किए हैं कि ये लुटेरे गठबंधन होकर लोगों को फिर से बेवकूफ बनाने के लिए किस तरह तैयार हो रहे हैं।😲

    • हम तो बेवकूफ हैं ही ये देश को बर्बाद करने पर तुले हैं अपनी स्वार्थ के कारण।

  • A harsh reality of Indian politics… Bahut sundar kataaksh kiya hai is kavita me… 2019 ke chunav me vipaksh ke pass koi mudda nhi hai except “Modi hatao”… Very well penned… 👏👏👍🙏

  • आपने मेरे विचारों को कविता में ढाल दिया है . सचमुच राजनीति और चुनाव में जनता हीं बेचारी होती है . सत्ता और सत्ताधरियो के स्वार्थ का अंत नहीं . आपने सही आघात वर्तमान राजनीति खेल पर किया है .

  • अब जनता लाचार नही है-ये ही दिन जनता को सिर पे बैठाने के हैं।😄😄😄😄😍

  • पर राजनीति के खेल तो मुझे क्रिकेट से भी मजेदार लग रहे हैं।बड़े ऐश किये हैं सभी ने अब भिखारी से दिख रहे हैं।बस यही दिन जनता का अपना दिन है।are you agree?😂😂😂😂

          • Yahaan janta hai kahaan……koyee Ram ka bhakt hai koyee Allaah kaa , kayee jaatiyon men baant diye gaye ham….Janta kahaan rahe.

          • नहीं बहुत कुछ अधिकार हैं जनता के पास,पर आलसी बहुत हैं।वही पुरानी आदत अभी तक नहीं गई-कोऊ नृप भयो,हमें का हानि।😌

  • Wah… जनता को लोकतंत्र का लॉलीपॉप देकर कुछ 543 लोग राजा बने घूमते हैं ।

    • सही कहा ये राजा ही हैं जो सत्ता पाने को कुछ भी कर सकते हैं। इनका असर कल भी था और आज भी। तभी तो—

      कल राजतन्त्र था तो
      बोलने की आजादी नही थी,कुछ कहने ना दिया,
      अब बोलने की आजादी है,
      हक मांगने की आजादी है मगर
      लोकतंत्र में हमें जनता रहने ना दिया,
      अब हम जात,धर्म और क्षेत्र के लिए लड़ते हैं
      और वे मजे से शासन करते हैं।

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