Jindagi
गुड्डा मैं एक घरौंदे का,
जिसकी तु प्यारी गुड़िया है,
यादों में मेरी तू बसती,
तुममे ही मेरी दुनियाँ है,
तू रूठ गयी रब रूठ गया,
था बना घरौंदा टूट गया,
ये मान सका ना पागल दिल,
सपनों का सागर सूख गया,
कहते हैं सब मैं पागल हूँ,
सब कहते तू अब नहीं रही,
उस बाढ़ में कोई नही बचा,
सब कहते तुम भी बची नहीं,
तू मिश्री दूध सा मेरा मन,
घुलकर तूुुम अलग हुई कैसे,
हर ईंट में खुशबू है तेेरी,
यादों को भूलूँ मैं कैसे,
मैं आज भी उसी घरौंदे की
हर ईंट को रोज सजाता हूँ,
तुम आएगी वापस एक दिन,
मैं स्वप्न का महल बनाता हूँ।
कल ही तो ख्वाब सजाये थे,
एक रात में कैसे बिखर गया,
कितनी छोटी सी दुनियाँ थी,
बिन तेरे और भी सिमट गया,
हाँ, हाँ सच मे मैं पागल हूँ,
अब भी मैं ख्वाब सजाता हूँ,
तुम आएगी वापस एक दिन,
हर ईंट को रोज सजाता हूँ,
हर ईंट को रोज सजाता हूँ।
!!! मधुसूदन !!!


सुन्दर चित्रण।
Sukriya apka apne pasand kiya aur saraahaa.
सुंदर
Dhanyawaad apka…
Speechless! Bohot hi badhiya likha hai Sir.
Thank you very much for your valuable comments…
Wow sir, bhavnau ko ke phool bikherti hui h ye rachna
Dhanyawaad apka pasand karne aur pratikriya byakt karne ke liye.
*चार चाँद
लास्ट के लाइन में बची नहीं।
गलती से रही हो गया है ह
बहुत ही अच्छा लिखा है मधुसूदन जी। एक ही कविता में कितने अर्थो का संगम है। बहुत खूब। एक गलत अर्थ दे रहा है जैसे सुख दुःख वाला अर्थ दे रहा है इसलिए समें बड़ा ऊ सूख होना चाहिए।
और तुक बन्दी ऐसे हो तो आपके कविता में चाँद लग जाएगा।
सब कहते तू अब रही नहीं।
उस बाढ़ में कोई बचा नहीं।
सब कहते तू अब रही नहीं।
बाकी लाइन परफेक्ट है।
शब्दों का हेर फेर है बस आपको अच्छा लगे तो एडिट कर ऐसे कर लीजिएगा।
सुक्रिया अपने पसंद किया सराहा साथ ही सुझाव भी दिया।आपका सुझाव सिर आंखों पर।
Behad khoobsurat 🙂
Sukriya apne pasand kiya aur saraha.
Waah Sir… Shaandar
Dhanyawad apka apne pasand kiya aur saraahaa
विरह,बाढ की प्रताडना एवं प्यार सबको इस कविता में एक साथ समेट लिया.सुंदर👌
Sukriya apne pasand kiya aur saraaha…..
aapki kavita pasand jo na kare use kavitao ki samaz hi nahi hogi😊
Kyaa baat…bahut badi baat kah di apne….mai bhi aapke jaisa hi hun…..sukriya hauslaafjaayee karne kw liye.
👍
बहुत जीवंत सुंदर शब्दों से हृदय विरादक घटना का वर्णन।
Haa pawan ji…. kisi par kya bitati hogi jab uska koyee apnaa paani me bahkar kho jaataa hogaa…sochne ka prayaas kiya hai…sukriya apka.
sadar abhinandan sir