LAKSHYA/लक्ष्य

बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते,
कभी गौर करना तब,जब बच्चों के पाँव
धरती पर पड़ते।
बीज शांत तबतक,जबतक गर्भ में होते,
अंकुरण का देर,फिर तो पल-पल ही बढ़ते,
अंकुर को वृक्ष होते देर नही लगते,
बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते।
छोड़ दो बहलाना खुद को,
किस बाग को,सजाना सोचो,
वृक्ष तो स्थिर,तेरे पाँव,
किधर जाना सोचो,
ख्वाब गर बदले,मंजिल बदल जाएगी,
पलभर की चूक,रण-निर्णय बदल जाएगी,
भगीरथ प्रयास पर,ध्रुव के पुकार पर,
गुरुभक्त आरुणि के भक्ति प्रवाह पर,
एकलव्य का एकाग्र,पाणिनि का जिद्द,प्रयास,
एक लक्ष्य साध जो हैं राह नित्य चलते,
वही पौध-वृक्ष बन प्रसून सा महकते,
बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते,
बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते।
!!!मधुसूदन!!!


Behad sunder rachna.
Bahut bahut dhanyawad paka.
बचपन पौधे के जैसा, और वृक्ष वृद्ध सा माना
लक्ष्य एक के पास है और दूजे को है पाना…
बहुत सुंदर कविता सर🙏
बहुत बहुत धन्यवाद आपका सराहने के लिए।🙏
बहुत खूबसूरत । प्रेरणादायक कविता ।
धन्यवाद आपका पसन्द करने के लिए।
बहुत बहुत स्वागत आपका ।
love the transition you created – very vivid
Bahut bahut dhanyawad apka sarahney ke liye.
My absolute pleasure
Awesome! Motivating! Inspiring 🙂
धन्यवाद भाई समय निकालकर पढ़ने और सराहने के लिए।
प्रेरणा दायक,, रचना
बहुत बहुत धन्यवाद मित्र।
Very motivational poem, Sir 😊
Bahut bahut Dhanyawad apka.🙏
Most welcome , Sir 😊
Motivating poem for me…
धन्यवाद भाई जी। वैसे ये डॉक्टर निमिष जी की देन है।
A poem of beauty about the growing child from the womb till he bounces back to maturity and becomes a handsome person like a beautiful trees throwing shadows for the coolness .
Absolutely…..Thank you very much for your beautiful comments.
All the best to you sirji.
एक लक्ष्य साध जो हैं राह नित्य चलते,
वही पौध-वृक्ष बन प्रसून सा महकते
👌👌👌❤❤❤
बहुत शानदार ….motivational 🌼
Loved it …
ये आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया का प्रतिफल है। स्वीकार करें।
❤🌼🙏 प्रणाम
🙏🙏