KASHMKASH
Images credit: Google
हम मुसाफ़िर सफर जिंदगी का,
राह मे थे खड़े,
दूर मंजिल मगर रास्ते दो,
थे कदम रुक गए।
सत्य का एक डगर,
राह काँटों भरी,
चाह मंजिल मगर,
मुश्किलों से भरी,
दूजा आसान मंजिल,
नजर आ रही,
छल कपट थी हमें,
ज्ञान सिखला रही,
कशमकश में था मन क्या करें हम,
थे सफर में खड़े,
दूर मंजिल मगर रास्ते दो,
थे कदम रुक गए।
छल से माना कि मंजिल,
तो मिल जाएगी,
पर तजे सत्य जीवन,
बिफल जाएगी,
ये भी सच है कि है सत्य,
कांटो भरा,
झूठ की राह से,
दिल भी घबरा रहा,
कशमकश बीच भंवर,
स्वार्थ में फंस गए,
दूर मंजिल मगर रास्ते दो,
थे कदम रुक गए।
आत्मा सत्य है,
सत्य परमात्मा,
सत्य की राह में ही,
मिलेगी जहां,
बुद्ध भी थे अकेला,
अडिग सत्य पर,
राम भी तो चले थे,
उसी राह पर,
सत्य हरिश्चन्द्र की,
सत्यता याद कर
मोरध्वज भक्त की,
सब कथा याद कर,
मन को झकझोरता आत्मा फिर ,
राह में क्यों खड़े,
कशमकश मिट गया मन से मेरे,
सत्य पर चल पड़े।
!!! मधुसूदन !!!



Awesome poem whereas the pic is concerned , it is 80 feet statue of Buddha in Bodhgaya , Gaya Bihar.
bahut umda Madhusudan ji bahut khub
Dhanyawad Danish ji apne pasand kiya aur saraahaa…
बहुत ही अच्छा से सत्य और झूठ के कशमकश को ब्यां किया है। बहुत खूब।
धन्यवाद आपका—-आपके प्रतिक्रिया का इंतजार रहता है साथ ही अजय बजरंगी भी हमारे बहुत प्रिय हैं—-शायद कही ब्यस्त होंगे।वर्डप्रेस की यही समस्या है कौन कब कहा किस हाल में है पता नही चलता।जबतक किसी का पोस्ट आते रहता है खुशी होती है।
बिलकुल सही लिखा है आपने झूठ और छल कपट से मंजिल भले ही मिल जाए पर मन का सुकून नही मिल सकता।अति सुंदर…
धन्यवाद आपका अपने पसन्द किया और सराहा।
आप ने मन के दुविधा की सही बात लिखी है और जीत सत्य की हुई . बहुत सुंदर विचार , काव्य के रुप में .
सुक्रिया आपका।
मस्त हैं….
Waah!
Dhanyawad sir…..
Behad sunder.
अतिसुंदर
सुप्रभात मित्र
Sukriya dost….suprabhat apko bhi.