Ummid/उम्मीद

बंद क्यों ना हो जाए,किवाड़ सब जमाने का,द्वार जिंदगी का कभी खुद से ना लगाना यारों,गिरते दरख़्त कई आँधियों के आने से,बीज हम दरख़्त बन सजेंगे फिर बताना यारों,जंग हर कदम कदम पर जिंदगी में जीत भी,छटेगा अँधेरा दीप खुद से ना बुझाना यारों,द्वार जिंदगी का कभी खुद से ना लगाना यारों।!!!मधुसूदन!!!

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