Tuksh nahi ho tum./तुक्ष नही हो तुम।

क्यों ना राहें हों अनजान राही मगरवे भी अपना सा लगने लगेंगे,जरा चलकर तो देख,मत समझ तुक्ष खुद को प्रणेता है तूँ,बदल किस्मत की रेख।बंजर,कंटीले हों क्यों ना डगर,मंजिल वहीं होंगे तेरे बसर,सजने लगेंगे वही ख्वाब तेरे,थिरकने लगेंगे वहीं पाँव तेरे,मिल जाएंगे फिर मुकाम,जरा चलकर तो देख,मत समझ तुक्ष खुद को प्रणेता है तूँ,बदल किस्मत […]

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Arthahin/अर्थहीन

दुख-सुख,हानि-लाभ,रूठते-मनाते,रोते,मुस्कुराते,चलता रहा वक़्त,चलते रहे हम,जैसे सूरज,सारी जिंदगी दहकते रहे हम,मगर इस आपाधापी में भूल गएउस डूबते सूरज को देखकर भी कि,एक दिन हमें भी रुकना है,हमें भी  डूब जाना है,कदम अग्रसर उसी ओरसजकर तैयारडोला भी,प्रतीक्षारत।वाह रे जिंदगी!क्या खोए,क्या पाएखोए रहे इसी में उम्र भर,इससे दूर स्वयं को हटा ना सके,अर्थहीन नही ये जीवन,इतना खुद को […]

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Krurta/क्रूरता

भूख से व्यग्र एक कुतिया,बार बार गलियों का चक्कर लगाती,इंसानों को देख अपनी पूँछें हिलाती,चेहरे के आव-भाव से भूखी होने का भाव दर्शातीमगर कहीं से भी रोटी का एक टुकड़ा नही मिल पाने परवापस अपने बच्चों के पास आकर लेट जाती,फिर टूट पड़ते नासमझ बच्चे उसपरऔर नोचने लगते स्तन।पेट में अन्न का दाना नहीऔर ना […]

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Kora Kagaj/कोरा कागज

जब भी उठती कलम चिल्लाता कोरा कागज,सिसक सिसककर दर्द सुनाता कोरा कागज।महिमामंडित गद्दारों का करते करते,शब्द बने बोझिल,शब्दों को सहते सहते,ऊब गया, खुद पर शर्माता कोरा कागज़,जब भी उठती कलम चिल्लाता कोरा कागज।लाखों खोए वीर वतन पर मिटनेवाले,नहीं यहाँ पर कोई उनपर लिखनेवाले,कब आएंगे वे दिन,कब वो कवि बता दे,बलिदानी के नाम शब्दों की झड़ी […]

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Daud/दौड़

टूटते गुम्बद,नित टूटते मंदिर,टूटती नही,जाति-मजहब की दीवारें,प्रेम से रिक्त होते दिल,और गगन चूमती नफरत की मीनारें,मिट गया वह भीजिसके चलने मात्र से हिलती थी धरती,नित मिट रहे कंस और दुर्योधन भी,मगर मिटती नही जग सेझूठी अहंकारें।वैसेगिराई तो तूने भी है,मेरे ख्वाबों का शीशमहल,तोड़े हैं रिस्ते,यकीन,वादे,किया है फरेबबहुत कुछ पाने को,फिर क्यों नही चमकते,तेरे चेहरे पर […]

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