Quote..28

वह पेड़ जिसपर कल झूला करते, पगडंडी,ईख का खेत,अमरूद की डाली सबकुछ आज भी वैसा का वैसा है, बदले तो गाँव की गलियाँ भी नही, जिसमें कल दौड़ा करते, मगर कल की तरह उनमें रौनक नही दिखती, सबकुछ उजड़ा,उजड़ा सा नजर आता है, ऐसा क्यों? कहीं चकाचौंध में खुद तो नहीं बदल गए । !!!मधुसूदन!!! […]

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Urmila Patra of Ramayna

Image Credit :Google बैदेही की बहन उर्मिला,की मैं कथा सुनाऊँ कैसे, चौदह वर्ष की बिरह,वेदना,त्याग,तपस्या गाउँ कैसे। जिस गुलशन में अभी-अभी आया बसंत का मेला था, फूल बनी ओ खिली ही थी की,बिरह ने डाला डेरा था, प्रियतम ही यमराज बना,सन्देश सुनाने आया, प्राणहीन काया कैसी ये,समझाने को आया, सिया-राम संग वन जाने को मन […]

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