Delhi/दिल्ली
किसी के घर जले,किसी की गाडियाँ,किसी की जिंदगी की उड़ान छीन ली,वाह रे गंगा यमुनी तहजीब!ये तेरा कैसा प्रेम?जिसने किसी का एक ही सूरज था,वो इकलौती संतान छीन ली।हम इसे,तेरे हक की मांग कहें,आंदोलन,कोई षड्यंत्र,या तुम्हें गुमराह कहें,जहाँ धर्म देख घर और गाडियाँ जलाई जा रही थी,जहाँ पेट्रोल बम से घरों में आग लगाई जा […]
