Lock-down/लॉक-डाउन

लॉक डाउन,मगर कुछ भी नही ठहरा,ना वक्त,ना जिंदगी,और ना ही मौत!हम भी कहाँ ठहरे,किसी के कदम चल रहे,किसी के कलम,किसी के आँसूं,और किसी की राजनीत!यूँ कहें तोलॉक डाउन है,मगर जिंदगी पहले से कहीं ज्यादा बेचैन है,और बेचैन है,वक़्त,मौत,कलम,पांव,आँसूऔर राजनीति भी पहले से कहीं ज्यादा!!!!मधुसूदन!!!

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BEBAS MAJDOOR/बेबस मजदूर

दर्दे-गम बहुत है गिनाऊँ कैसे,मजबूर हुआ खुद को बचाऊँ कैसे। हल,कुदाल,घन,चक्की चलाते,तपती हुई भट्ठी में तन को गलाते,टप-टप पसीने टपकते रहे,जलता लहू फिर भी हँसते रहे,मजदूर हूँ खुद को मजबूर नही माना,भीख किसे कहते हैं मैंने नही जानास्वाभिमानी हम भी,स्वाभिमान दिखाऊँ कैसे,मजबूर हुआ खुद को बचाऊँ कैसे। खाते में व्यापारी तनख्वाह नही डालते,शोषण कितना,क्या बताऊँ,क्या […]

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