KAISI CHAAHAT ? / कैसी चाहत?

बहुत हुआ अब हमको बाबर जैसा होना चाहिए, हमें भी गजनी,गोरी सा संहारक होना चाहिए।। बहुत भले थे खिलजी,लोधी और टीपू सुलतान, कासिम,तुगलक,मुगलवंश के शासक बड़े महान, कितने अच्छे कार्य किए कैसे उसको गिनवाऊँ, उनकी गौरवगाथा को किन शब्दों में दर्शाऊँ, तोड़ ध्रुव स्तम्भ बनाया कोई कुतुबमिनार, ढाई दिन का झोपड़ा में है दफन ज्ञानभंडार, […]

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PITA KAA MOL

देखा दुख ना जीवन में वह सुख की कीमत क्या जाने, जले पाँव ना धूप में जिनके छाँव की कीमत क्या जाने, क्या जाने माँ-बाप की कीमत,जिनके सिर पर हाथ सदा, सिर पर बाप का हाथ नहीं वो कीमत उनका पहचाने। वैसे तो कई रिश्ते होते अपने इस सारे संसार में, मगर बाप के रिश्ते […]

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AADAT CHAY KI/आदत चाय की

कहता रहा दिमाग,चाय सेहत के लिए ठीक नही,मगर मुश्किल था दिल को समझाना,मिलने का वक़्त मालूम,फिर भी इंतजार,चाय पीना तो था एकमात्र बहाना,घँटों की मुलाकात,लब खामोश,ये नित्य का सिलसिला था,आसान नही था कुछ भी कहना,फिर भी सुनने को आतुर वेऔर लब भी उस दिन कुछ यूँ हिला था,हम जीवन भर बर्तन धोते रहेंगे,तुम यूँ ही […]

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AKROSH/आक्रोश

हाथों मे सोने का कंगन लिए बाघ,खुद को शाकाहारी बन जाने का ढोंग करता,दुर्योधनी सोच लिए सरहद रौंदने को ततपर पड़ोसीमन में घृणित रोग रखता,दशानन का साधु बन आना,और हर बार तेराछला जाना,आखिर कब तक?आखिर कब तक उस अधर्मी संग धर्म निभाओगे,पाशे का छल,द्रौपदी की चीख,और उबाल लेता धमनियों मेंशोणित की प्रवाह भूल,कबतक?आखिर कबतक उस […]

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LAKSHYA/लक्ष्य

बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते,कभी गौर करना तब,जब बच्चों के पाँवधरती पर पड़ते।बीज शांत तबतक,जबतक गर्भ में होते,अंकुरण का देर,फिर तो पल-पल ही बढ़ते,अंकुर को वृक्ष होते देर नही लगते,बच्चे ही दौड़ते,बुजुर्ग नही दौड़ते।छोड़ दो बहलाना खुद को,किस बाग को,सजाना सोचो,वृक्ष तो स्थिर,तेरे पाँव,किधर जाना सोचो,ख्वाब गर बदले,मंजिल बदल जाएगी,पलभर की चूक,रण-निर्णय बदल जाएगी,भगीरथ प्रयास […]

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ATMAHATYA/आत्महत्या

स्तब्ध हूँ, इस तरह चले जाना तेरा ठीक नही,माना जीवन क्षणभंगुर मगर,इस कदर अपनों कोतड़पाना भी तो ठीक नही,काश अपनी मजबूरियाँ अपनों को बताते,कोई न कोई राह जरूर निकल आते,थोड़ी सी चोट और छलक जाते हैं आँसू,छुपाता कोई बिस्तर भिगोता है,तुम तो मर्द है,क्या हुआ,ऐसे लड़कियों की तरह रोता क्यों है?कुछ ऐसा ही कहा जाता […]

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Achraj mat karna/अचरज मत करना

अभी मरघट में जगह शेष,वे उपलब्धियाँ गिनाने लगे,हम घरों में कैद कोरोना से लड़ें या भूख से,या सड़कों पर करें मौत से जद्दोजहद,उन्हें क्या,वे अब राजनीत अपना चमकाने लगे।कोरोना का नित्य बढ़ता ग्राफ,बुझते दीपक,सिकुड़ते बेड,वीरान होते घर!और होती सिर्फ राजनीत!ऐसा नही कि समाजसेवियों का अकाल हो गया,ऐसा भी नही की राजनीति में सिर्फ,चोर,डकैत,बलात्कारियों का ही […]

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KASURWAR KAUN/कसूरवार कौन?

कभी कहते जिसे शरबती आँखें,अब नीर भरा समंदर खारा है,जिससे रिसते नीर,हरपल,दोष किसका,उनका तो नही,सब कुसूर हमारा है।हर मौसम ऋतुराज कलतक,मैं भी मधुमास से कम नही,पवित्र ऐसे जैसे कोई तीर्थ,मेरे समान निर्मल गंगा,जमजम नही,दौड़े चले आते ऐसे जैसे वर्षों का कोई प्यासा,मैं ही थी मीरा उनकी मैं ही थी राधा,खिली पंखुड़ियों सी अधरेंटपकते मकरन्द,कोयल सी […]

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