MAA/माँ

आज मशीनी युग,कल ढेकी,चक्की का दौर,हुक्मउदूली ना हो जाए,दौड़ती चहुँओर,वैसे तेरे ममत्व,वात्सल्य,त्याग की तुलना बेमानी है,मगर जो मेरे आँखों के सामनेचलचित्र की भांतिदौड़तीउसकी दास्ताँ पुरानी है,आज डायपर,बिजली पंखों का काल,कल भींगे बिस्तर और ठिठुरन भरी रात,न जाने कितनी रात तुम जागकर बिताई होगी,सूखे बिस्तर पर हमें सुलाकर,न जाने कैसे,गीले बिस्तर पर तुझे नींद आई होगी!बचपन,जब […]

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