SANDESH/संदेश

कितने विवश थे सिंघासन और हस्तिनापुर से बंधेभीष्म,द्रोण,कृपाचार्य,अश्वस्थामा जैसेपरमशक्तिशाली महापुरुष,और महर्षि विदुर जैसेमहाज्ञानी भी,जो स्वयं को मिटा तो सकते थे, मगर अपने वचनों से पीछे हटना नामुमकिन।वे अपनी आँखों कुल का अपमान होते देखते रहे,गलत था दुर्योधन,पुत्रमोह से ग्रसित थे धृष्टराष्ट्र,शकुनि की कुटिलता,कर्ण की सोच,सब समझते हुए भी विवश,अधर्म संग रहते रहे,और अंत में वही […]

Posted in Dharm-ParampraTagged 49 Comments on SANDESH/संदेश

DIWAS/दिवस!

प्रयावरण दिवस,हिंदी,विश्व धरोहर दिवस,अंतराष्ट्रीय महिला दिवस,संविधान दिवस,न जाने कितने दिवस बनाए,पन्नो पर उसे सजाए,मगर हमने बचाए क्या?ये ना पूछ बैठना,हमने मिटाए क्या?चीखती नदियाँ,कराहते जंगल,बेजुबानों के लाश पर मनाते मंगल,घँटे,अजान से गुंजित धर्मस्थल,प्रेम कितना शेष अंतस्थल!गिरिजाघर,मस्जिद,मंदिर सर्वत्र दिख जाएंगे,और घर-घर गीता,कुरान भीमगर अपनाए क्या?ये ना पूछ बैठना,हमने मिटाए क्या?!!!मधुसूदन!!!

Posted in Hindi Poem, Lekhni17 Comments on DIWAS/दिवस!

PATTHAR/पत्थर

मैं तुक्ष,राहों में बिखरा मामूली पत्थर,मर्जी तेरी ईश्वर मान मंदिर में स्थापित कर,महल बना या सेतु,मगरअरे हाड़-मांस के बनेसभ्य और संस्कारी मानव,मुझे किसी की हत्या का कारण मत बना,माना मैं निर्जीव बिना जान का,मगर तुझे क्या पता,तेरी खुशियों में मैं भी,खुश होता हूँ,और जबकिसी निर्दोष की हत्या में हमें,अपना साझीदार बनाता है,तो अरे बेखबर,औरों की […]

Posted in Hindi Poem, NAFRATTagged 39 Comments on PATTHAR/पत्थर

VIPLAV/विप्लव

ये आहट प्रलय या कर्मों की सजा है,या कोई सबक या कयामत की निशा है।है क्या ये सबकी समझ से परे,शीतल हवा भी जहर से भरे,सूनी हैं सड़कें,गलियाँ वीराना,कैदी बना है ये सारा जमाना,क्रंदन,शवों में ये सिमटा जहाँ है,ये आहट प्रलय या कर्मों की सजा है।दिनकर किरण,चन्द्र की कौमुदी से,कैसा तिमिर ना डिगे इस महि […]

Posted in Hindi PoemTagged 19 Comments on VIPLAV/विप्लव

भूख/BHUKH

आपदा भारी,मजबूर सभी,बेबस कौन?ये सवाल ना पूछो,लाचारी सर्वत्र है फिर भी,मजदूरों के हालात ना पूछो।मशीन एक लोहे की,दूजा हाड़-मांस का,संकट में वतन,मशीनों के जज्बात क्या,ताले जड़े कर्मस्थल पर,अल्लाह कहाँ मलिकार ना पूछो,लाचारी सर्वत्र है,मजदूरों के हालात ना पूछो।ऐ दिल मत रो,तेरा कोई दातार नही,भूख तो सर्वत्र तांडव करती,तेरा कोई घर-द्वार नही,यही बात खुद को समझाते,लाख […]

Posted in MaZdoor aur KiasanTagged 19 Comments on भूख/BHUKH

MAZDOOR/मजदूर

मजदूरों की ख्वाब,दशा,कैसी हालात सुनाएँ रे,कदम वहाँ चल देते उनकी रोटी जहाँ बुलाये रे |२तपती भट्ठी बदन गलाते,दो रोटी फिर मुँख में आते,अगर मिला मजदूरी निसदिनखुद-किश्मत वे खुद को पाते,मगर आज उस रोटी पर भीदेखो कैसी शामत आई,सुविधाओं का शोर बहुत,क्या साधन उनके दर तक आई?दिनकर उगता,चाँद निकलता,तम नागिन बन पल,पल डँसता,विवश छलकते आँसूं दर्द […]

Posted in Labour DayTagged 40 Comments on MAZDOOR/मजदूर

ANKAHA PREM/अनकहा प्रेम 2

एक पवन का झोंका आया,जिसने मेरा मन भरमाया,पल दो पल का मेल पता ना,जीवन का कब सार हुआ,पता नही कब दिल खो बैठे,पता नही कब प्यार हुआ।मैं राही अनजान डगर था,अनजाना एक साथ सफर था,मंजिल से बेखबर चले पग,थकन कहाँ हर कदम जशन था,जब रोते वे हम रो जाते,वे हँसते तो हम मुस्काते,पता नही कब […]

Posted in Hindi PoemTagged 17 Comments on ANKAHA PREM/अनकहा प्रेम 2

AAWO MILKAR DIYA JALAYEN/आओ मिलकर दिया जलाएँ

देखो आया संकट भारी,जूझ रही है दुनियाँ सारी,एक अदृश्य रिपु दिल दहलाया,मानव को ही अस्त्र बनाया,वक्त विकट,विकराल रिपु,आ संयम अपना हम दिखलाएँ,विश्व ससंकित,दहशत में जग,आओ मिलकर दिया जलाएँ।वक़्त नही ये द्वंद्व का नफरत छोड़,त्याग दिखलाओ प्यारे,अगर बचे तो फिर लड़ लेंगे,खुद को अभी बचा लो प्यारेछोड़ो हठ मत कर मनमानी,धर्म कहा कब कर शैतानी,मान जगत,रब […]

Posted in Hamaara SamaajTagged 13 Comments on AAWO MILKAR DIYA JALAYEN/आओ मिलकर दिया जलाएँ

Wada/वादा

जिंदगी है तूँ मेरी,इतना भी समझ न पाए,फिर लफ्जों से बयान क्या करना,जब आँखों में देख ना पाए समर्पण मेरे,फिर वादों का ऐतबार क्या करना।तुम वृक्ष हो मैं छाया,मैं मय तुम प्याला,अगर तुम मिट गए तो हम बिखर जाएंगे,तुझे खोना तो दूर,तुम रूठे तो मर जाएंगे,तेरी अहमियत कितना मेरे जीवन में जब,अबतक समझ न पाए,फिर […]

Posted in DIL, Hindi PoemTagged 13 Comments on Wada/वादा

YE KAISI NAFRAT/ये कैसी नफरत

शारीरिक बीमारी का इलाज सम्भव,मन की विकृति को मिटाए कौन?जब नफरत भरा दिल में,उसे प्रेम का दरिया दिखाए कौन?एक आँधी सी चली है जमाने में,कमियाँ ढूँढनेवालों की,ऐसे बुद्धिजीवियों को खूबियाँ दिखाए कौन?मुमकिन है अँधों को भी राह दिखाना,जो आँखें बंद कर ले उसे डगर दिखाए कौन?विश्व को जगाता रहा ज्ञान के प्रकाश से,घर में बैठे […]

Posted in Desh BhaktiTagged 8 Comments on YE KAISI NAFRAT/ये कैसी नफरत

TABLIGHI JAMAAT/तबलीगी जमात

मजहबी जलसा इंसानियत पर भारी हो गया,वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला हीभारत पर भारी हो गया।ताज्जुब नही हमें,चहुँओर होते शोर का,तेरे कुतर्कों,मुरखपन के जोर का,बेशक कातिल है तूँ फिर भी तुझे धर्म से जोड़,कई और तेरा साथी हो गया,वाह रे तबलीगी जमात तूँ अकेला हीभारत की उम्मीदों पर भारी हो गया।जब सम्पूर्ण विश्व कोरोना […]

Posted in Desh BhaktiTagged 18 Comments on TABLIGHI JAMAAT/तबलीगी जमात