CHUPPI/चुप्पी
सुना है श्रद्धा हो मन में तो रबपत्थर में मिल जाते हैं,प्रेम की भाषा इंसां क्या,पशु-पक्षी,जानवर भी समझ जाते हैं,माँ खुश होती,जब बच्चा दूध पी लेता,दानी खुश होता जब जरूरतमंद को कुछ दे देता,प्रफुल्लित होती नदियाँ,किसी की प्यास मिटाकर,झूम उठते वृक्ष,अपना फल खिलाकर,हिम ना पिघलता,नदियों का कोई वजूद नही होता,तुम ना होते,इन शब्दों का भीकोई […]
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