KASURWAR KAUN/कसूरवार कौन?

कभी कहते जिसे शरबती आँखें,अब नीर भरा समंदर खारा है,जिससे रिसते नीर,हरपल,दोष किसका,उनका तो नही,सब कुसूर हमारा है।हर मौसम ऋतुराज कलतक,मैं भी मधुमास से कम नही,पवित्र ऐसे जैसे कोई तीर्थ,मेरे समान निर्मल गंगा,जमजम नही,दौड़े चले आते ऐसे जैसे वर्षों का कोई प्यासा,मैं ही थी मीरा उनकी मैं ही थी राधा,खिली पंखुड़ियों सी अधरेंटपकते मकरन्द,कोयल सी […]

Posted in Hindi Poem, Jiwan dharaTagged , 47 Comments on KASURWAR KAUN/कसूरवार कौन?